जमशेदपुर। राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), एनआईटी (NIT) जमशेदपुर के तत्वावधान में शनिवार को संस्थान के प्रांगण में “सामाजिक दायित्व एवं व्यक्तित्व विकास” विषय पर एक प्रेरक विशेषज्ञ संवाद का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे भावी इंजीनियरों और युवाओं में तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व का निर्माण करना और समाज के प्रति उनकी वास्तविक जिम्मेदारी का बोध कराना था। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में एनआईटी जमशेदपुर के पूर्व प्राध्यापक डॉ. रणजीत प्रसाद ने शिरकत की। उन्होंने अपने गहन अनुभव और ज्ञान के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा, आत्मनिर्भरता और नवाचार की दिशा में विद्यार्थियों की अहम भूमिका पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।
शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित न रहे, जमीनी समस्याओं का निकले समाधान
संवाद को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. रणजीत प्रसाद ने विद्यार्थियों को एक नई और व्यावहारिक दृष्टि प्रदान की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आज के दौर में शिक्षा का उद्देश्य केवल कॉलेज की डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सच्ची शिक्षा वही है जो समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को समझे और जमीनी स्तर की समस्याओं का ठोस समाधान प्रस्तुत करे। उन्होंने युवा इंजीनियरों और छात्रों से आह्वान किया कि वे सिर्फ किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि गांव, समाज, स्थानीय किसानों, ग्रामीण कारीगरों तथा लघु व मध्यम उद्योगों (MSME) से जुड़ें। उन्होंने बताया कि तकनीकी ज्ञान का असली और सार्थक उपयोग इन वर्गों की दैनिक चुनौतियों को समझने और उन्हें आसान व प्रभावी समाधान देने में ही निहित है।
जड़ों से जुड़े रहकर ही आसमान की ऊंचाइयों को छू सकते हैं युवा
कार्यक्रम के दौरान छात्रों को प्रेरित करते हुए डॉ. प्रसाद ने एक बेहद अहम और जीवनोपयोगी मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि “जड़ों से जुड़े रहकर ही आसमान की ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है।” इसका तात्पर्य यह है कि छात्र चाहे तकनीकी और विज्ञान के क्षेत्र में कितनी भी प्रगति कर लें, बड़े-बड़े आविष्कार कर लें या दुनिया के किसी भी कोने में सफलता के झंडे गाड़ दें, लेकिन उन्हें अपनी मिट्टी, अपनी संस्कृति और अपने समाज के निचले तबके को कभी नहीं भूलना चाहिए। उनकी यह बात उपस्थित विद्यार्थियों के दिलों में गहरी उतर गई। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में नवाचार (इनोवेशन) को सबसे बड़ा हथियार बताते हुए उन्होंने छात्रों से नई और रचनात्मक सोच विकसित करने को कहा।
राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं विद्यार्थी, सामाजिक सरोकारों से जुड़ें
इस प्रेरक संवाद कार्यक्रम में एनएसएस (NSS) के प्रोग्राम कॉर्डिनेटर डॉ. जयेन्द्र कुमार और गो ग्रीन क्लब के प्रभारी डॉ. नवीन कुमार वेलदुर्थी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इन दोनों अतिथियों ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए सामाजिक सरोकारों से गहराई से जुड़ने की भावपूर्ण अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण और एक मजबूत समाज का सपना तभी पूरा हो सकता है, जब देश का युवा अपनी असीम ऊर्जा और ज्ञान का सही दिशा में इस्तेमाल करते हुए अपनी सक्रिय भागीदारी निभाए। विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारियों को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
आत्मचिंतन की ओर बढ़े युवाओं के कदम, समग्र विकास का लिया संकल्प
इस पूरे कार्यक्रम का सफल और व्यवस्थित समन्वयन एनएसएस एनआईटी जमशेदपुर के विद्यार्थी संयोजक निर्मल निरंजन पाटिल द्वारा किया गया। विशेषज्ञ संवाद में संस्थान के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह और सक्रियता के साथ भाग लिया और वक्ताओं के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना। यह संवाद विद्यार्थियों के लिए महज एक व्याख्यान न रहकर आत्मचिंतन का एक सुनहरा अवसर साबित हुआ। इसके माध्यम से युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी, तकनीकी नवाचार, आत्मनिर्भरता और अपने समग्र व्यक्तित्व के विकास के प्रति एक नई जागरूकता का संचार हुआ है। कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने समाज के प्रति अपने कर्तव्यों के निर्वहन का संकल्प लिया।




