
जमशेदपुर।
नगर के प्रख्यात चिंतक, शिक्षाविद एवं बी.पी.एम. +2 उच्च विद्यालय, बर्मामाइंस के संस्थापक प्रधानाध्यापक स्वर्गीय मोतीलाल सिंह जी की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर झारखंड पेंशनर कल्याण समाज, जमशेदपुर के सभागार में एक गरिमामय स्मृति सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नगर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं समाजसेवियों ने मोती बाबू के जीवन, व्यक्तित्व और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।


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शिक्षा के माध्यम से समाज-निर्माण का संकल्प
वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय मोतीलाल सिंह केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक ऐसे शिक्षाविद थे जिन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने बी.पी.एम. +2 उच्च विद्यालय की स्थापना कर हजारों विद्यार्थियों को ज्ञान, संस्कार और आत्मविश्वास से सुसज्जित किया। उनके नेतृत्व में यह विद्यालय अनुशासन, गुणवत्ता और नैतिक मूल्यों का केंद्र बना।
वक्ताओं ने साझा किए संस्मरण
कार्यक्रम में साहित्यकार श्री राजदेव सिन्हा, श्री अशोक शुभदर्शी, श्री बरुण प्रभात, पूर्व शिक्षाधिकारी श्री एस.पी. सिंह तथा श्री चन्द्रदीप पाण्डेय ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने मोतीलाल सिंह को एक दूरदर्शी शिक्षाविद, संवेदनशील प्रशासक और समाज के पथप्रदर्शक के रूप में याद किया।
श्री राजदेव सिन्हा ने भावुक शब्दों में मोती बाबू को “प्रधानाध्यापकों का प्रधानाध्यापक” बताते हुए कहा कि उनके सान्निध्य में बिताया गया हर क्षण आज भी प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि मोतीलाल सिंह का व्यक्तित्व सरल, करुणामय और ऊर्जावान था, जो हर विद्यार्थी और शिक्षक को उत्कृष्ट बनने की प्रेरणा देता था।
साहित्य, संस्कृति और समाज के प्रति समर्पण
वक्ताओं ने बताया कि मोतीलाल सिंह शिक्षा के साथ-साथ साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना के भी प्रबल समर्थक थे। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें जागरूक, जिम्मेदार और नैतिक नागरिक बनने की प्रेरणा दी।
श्रद्धा से पुष्प अर्पण
स्मृति सभा के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने स्वर्गीय मोतीलाल सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पूरे सभागार में भावुक और श्रद्धाभाव से भरा वातावरण रहा, जहां सभी ने मौन रखकर उनके महान योगदान को नमन किया।
आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ किया गया कि स्वर्गीय मोतीलाल सिंह द्वारा स्थापित शिक्षा, नैतिकता और सेवा के मूल्यों को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सकें



