
जमशेदपुर,। जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के शिक्षकेतर कर्मचारी संघ की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को सिदगोड़ा स्थित स्वर्णरेखा ऑडिटोरियम में आयोजित की गई। संघ के अध्यक्ष गंगाधर नाग की अध्यक्षता में हुई बैठक में संगठन को मजबूत बनाने, वित्तीय पारदर्शिता, वोकेशनल कर्मचारियों को सदस्यता देने तथा कर्मचारियों के अधिकारों और सम्मानजनक कार्य वातावरण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में वोकेशनल कर्मचारियों के लिए 100 रुपये मासिक सदस्यता शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया। वहीं, तपन कुमार मोदक को वोकेशनल कर्मचारियों का प्रतिनिधि चुना गया।
बैठक में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों द्वारा समय पर वेतन और बोनस की मांग उठाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कथित दबाव बनाए जाने तथा डराने-धमकाने की घटनाओं पर चिंता जताई गई। संघ ने कहा कि कर्मचारियों को अपने वैध अधिकारों की मांग करने के कारण भय या असुरक्षा का सामना नहीं करना चाहिए। समय पर वेतन, लंबित देयकों का भुगतान और सेवा शर्तों के तहत मिलने वाली सुविधाओं की मांग को अनुशासनहीनता नहीं माना जाना चाहिए।
संघ ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य विश्वविद्यालय प्रशासन से टकराव करना नहीं, बल्कि संस्थान में पारदर्शी, नियमसम्मत और सम्मानजनक कार्य संस्कृति को बढ़ावा देना है। बैठक में कहा गया कि अनुशासन का अर्थ भय और प्रशासनिक अधिकार का अर्थ मनमानी नहीं होना चाहिए। कर्मचारियों को सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना संस्थान की जिम्मेदारी है।
बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता खोलने का प्रस्ताव
संघ की वित्तीय व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए वर्तमान सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खाते के स्थान पर बैंक ऑफ बड़ौदा में नया खाता खोलने का प्रस्ताव रखा गया। वर्तमान खाते में पदाधिकारियों के नाम में बदलाव, संस्थान के नाम में आवश्यक सुधार और डिजिटल भुगतान की सुविधा से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों पर चर्चा हुई। सदस्यों के समक्ष संघ की उपलब्ध राशि और आय-व्यय का विवरण रखने पर भी जोर दिया गया।
विश्वविद्यालय द्वारा वेतन से संघ की सदस्यता राशि की कटौती बंद किए जाने के बाद सदस्यता शुल्क सीधे कोषाध्यक्ष के पास जमा करने की व्यवस्था पर चर्चा की गई। नई बैंकिंग व्यवस्था शुरू होने के बाद क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव है।
वोकेशनल कर्मचारियों को संगठन से जोड़ने पर जोर
बैठक में वोकेशनल कर्मचारियों को संघ की सदस्यता देने के प्रस्ताव पर सहमति बनी। इनके लिए 100 रुपये मासिक सदस्यता शुल्क निर्धारित किया गया। तपन कुमार मोदक को उनका प्रतिनिधि चुना गया। संघ ने कहा कि कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा शर्तों में अंतर होने के बावजूद उनके श्रम, सम्मान और गरिमा का समान महत्व है। सभी कर्मचारियों को संगठन से जोड़ने से उनकी समस्याओं को साझा मंच पर उठाने में मदद मिलेगी।
राज्यस्तर पर कर्मचारी एकता मजबूत करने की पहल
बैठक में झारखंड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ से जुड़ाव तथा राज्यस्तर पर कर्मचारी संगठनों के बीच समन्वय की दिशा में हुई प्रगति की जानकारी दी गई। संघ ने इसे कर्मचारी हितों की रक्षा और संगठनात्मक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
सदस्यों ने वेतन भुगतान, लंबित देयकों के निपटारे, सेवा सुरक्षा, पदोन्नति, निर्धारित कार्य-दायित्व और कर्मचारियों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। कर्मचारियों की समस्याओं को लिखित रूप में दर्ज कर संबंधित अधिकारियों के समक्ष नियमानुसार रखने की व्यवस्थित प्रक्रिया विकसित करने का सुझाव भी दिया गया।
संघ ने कहा कि किसी कर्मचारी की समस्या केवल इसलिए नजरअंदाज नहीं होनी चाहिए कि वह अपनी बात खुलकर नहीं रख पा रहा है। संगठन प्रत्येक सदस्य के अधिकारों की रक्षा और समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास करेगा।
बैठक में अध्यक्ष गंगाधर नाग, सचिव सीमा तिर्की, उपाध्यक्ष चैतन्य शिरोमणि, कोषाध्यक्ष लक्ष्मी जाल, संयुक्त सचिव अशोक भट्टाचार्य और शंकर दास के अलावा मनीष दास, रामबालक भगत, नारायण नाग, तुलसी बाग, सुजाता मुखी तथा अन्य कर्मचारी उपस्थित थे। सभी वोकेशनल कर्मचारी भी बैठक में शामिल हुए। संघ के संरक्षक विश्वम्भर यादव ने बैठक की सफलता और संगठन की मजबूती के लिए शुभकामनाएं दीं।
बैठक का समापन कर्मचारी एकता, पारदर्शिता, आपसी सहयोग और कर्मचारियों के वैध अधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ। संघ ने दोहराया कि सम्मानजनक कार्य वातावरण और कर्मचारियों की समस्याओं का न्यायपूर्ण समाधान विश्वविद्यालय के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।

