
जमशेदपुर.


टाटा स्टील फाउंडेशन की तरफ से आदिवासी सभ्यता और संस्कृति पर आधारित ‘संवाद’ कार्यक्रम आयोजन के चौथे दिन गोपाल मैदान में विभिन्न राज्यों के समूहों ने एक से बढ़कर नृत्य किए जिसे देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो गए. इससे पहले काला घोड़ा एसोसिएशन और संवाद के बीच एक साथ ए एम यू भी किया गया. काला घोड़ा एसोसिएशन अगले साल रजत जयंती के अवसर पर दक्षिण मुबई के पाॅश इलाके में विशाल कार्यक्रम का आयोजन करने जा रहा है. इस काला घोड़ा उत्सव में हर साल दो करोड़ से ज्यादा लोग आते हैं और लोगो को अपनी कला को दिखाने का मौका मिलता है.
वही संवाद के चौथे दिन कई जनजातियों ने अपने संगीत और नृत्य शैलियों का प्रदर्शन किया. त्रिपुरा की 19 जनजातियों वाले त्रिपुरियों ने ममिता नृत्य किया. महाराष्ट्र के ज्यादातर मछुआरों और महिलाओं की डोंगर कोली जनजाति ने कोली नृत्य से दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया. तेलंगाना की कोलम और गोंड जनजाति ने मोर पंखों वाली टोपी पहनकर और संगीत वाद्ययंत्र लेकर नृत्य के माध्यम से विवाह की रस्म को व्यक्त किया. नागालैंड की पहाड़ियों से आई लोकगीत मंडली ने जीवंत नृत्य मुद्राओं और लयबद्ध ताल के माध्यम से प्राचीन नागा कहानियों को सुनाया.
इस लोककथा समूह में नागालैंड की 17 जनजातियों में से प्रत्येक से दो प्रतिनिधि शामिल हैं. गोपाल मैदान में एक स्टॉल में स्थापित जनजातीय व्यंजन आतिथ्य के मेनू में हर व्यंजन का स्वाद लेने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है.



