
जमशेदपुर।
धर्मरक्षिणी पौरोहित्य महासंघ इस वर्ष भी अज्ञात पितरों के लिए सामूहिक तर्पण का आयोजन करने जा रहा है। यह कार्यक्रम रविवार, 14 सितंबर 2025 को अष्टमी श्राद्ध के दिन सुबह 8 बजे से शुरू होगा। इस अवसर पर महासंघ के आचार्यगण उन पितरों के लिए तर्पण करेंगे, जिनके कुल में कोई तर्पण करने वाला नहीं है या जो किसी कारणवश इस कर्म को संपन्न नहीं कर पाते।


महासंघ ने बताया कि यह आयोजन पूर्णत: सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की भावना से किया जाएगा। तर्पण के पश्चात गरीबों एवं जरूरतमंदों के बीच वस्त्र वितरण किया जाएगा, साथ ही वृद्धाश्रम में भोजन कराने की भी व्यवस्था की गई है।
महासंघ के अध्यक्ष पं. विपिन कुमार झा ने जानकारी देते हुए कहा कि सनातन धर्म की रक्षा और उसका प्रचार-प्रसार ही धर्मरक्षिणी पौरोहित्य महासंघ का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के ग्यारहवें स्कंध के 20वें अध्याय का उल्लेख करते हुए बताया कि अज्ञात पितरों के लिए तर्पण करना अत्यंत पुण्यकारी और श्रेष्ठ कार्य है। उनके अनुसार, पितृपक्ष में तर्पण करने से न केवल पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि वंशजों के जीवन में भी सुख-समृद्धि आती है।
महासंघ के महासचिव आचार्य उमेश कुमार तिवारी ने भी इस अवसर पर तर्पण के महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि संध्योपासन में सुर्यार्घ्य से मन्देहादि राक्षस भस्म होते हैं और तर्पण से संपूर्ण ब्रह्मांड का कल्याण होता है। इसलिए पितृपक्ष में इस तरह का सामूहिक आयोजन न केवल समाज को धार्मिक दृष्टि से जागरूक करता है, बल्कि लोगों में परोपकार और सेवा की भावना को भी मजबूत करता है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और समाजसेवियों की उपस्थिति की संभावना है। महासंघ ने सभी से अपील की है कि वे इस अवसर पर सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित करें और अज्ञात पितरों की आत्मा की शांति के लिए योगदान दें।


