
जमशेदपुर। झारखंड के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कार्यरत गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की सेवा-संबंधी समस्याओं और विभिन्न मांगों को अब राज्यस्तरीय कर्मचारी मंच पर उठाया जाएगा। झारखण्ड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ को झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने विधिवत संबद्धता प्रदान की है। इसकी घोषणा रविवार को आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में दोनों महासंघों के महामंत्रियों ने की।
झारखण्ड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के महामंत्री विश्वम्भर यादव तथा झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के महामंत्री बीरेंद्र यादव ने बताया कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के अनुरोध पत्रांक 047, दिनांक 10 सितंबर 2026 के आलोक में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पत्रांक 61, दिनांक 21 सितंबर 2026 के माध्यम से संबद्धता दी गई है।
दोनों महासंघों ने कहा कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा-संबंधी समस्याओं, सामाजिक सुरक्षा, वेतन, पदोन्नति, ACP/MACP, नियमित नियुक्ति और अन्य न्यायसंगत मांगों को अब व्यापक कर्मचारी आंदोलन का हिस्सा बनाया जाएगा।
नियमित गैर-शिक्षकेत्तर नियुक्ति की मांग
विश्वम्भर यादव ने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की संख्या लगातार कम हो रही है। नियमित नियुक्तियों के अभाव में प्रशासनिक, तकनीकी, कार्यालय, पुस्तकालय, परीक्षा, लेखा, कंप्यूटर, डाटा प्रबंधन और प्रयोगशाला जैसे कार्यों के लिए संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों पर निर्भरता बढ़ी है।
महासंघ ने आवश्यक स्वीकृत एवं रिक्त पदों की समीक्षा कर नियमित गैर-शिक्षकेत्तर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
ACP/MACP और पदोन्नति के लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन की मांग
महासंघ ने पात्र नियमित कर्मचारियों के लंबित ACP/MACP मामलों के शीघ्र निष्पादन की मांग की। संगठन के अनुसार अधिकांश विश्वविद्यालयों में पात्र कर्मचारियों को इसका लाभ मिलने के बाद कोल्हान विश्वविद्यालय और जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के लंबित मामलों का भी नियमानुसार निष्पादन किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही पात्र नियमित कर्मचारियों की लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग की गई।
पुनर्संरचित पदों पर समायोजन और पदोन्नति
महासंघ ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के संकल्प संख्या 899, दिनांक 29 अप्रैल 2026 का उल्लेख करते हुए राज्य के विश्वविद्यालयों में पुनर्संरचित पदों के अनुरूप योग्य एवं अनुभवी कर्मचारियों के समायोजन की मांग की।
संगठन का कहना है कि लंबे समय से संबंधित कार्य कर रहे कर्मचारियों की शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता, अनुभव और पात्रता का परीक्षण कर लागू नियमों के अनुसार उपलब्ध पदों पर समायोजन, अवशोषण या नियोजन पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही पात्र नियमित कर्मचारियों को पुनर्संरचित पदों के अनुरूप पदोन्नति का लाभ देने की मांग की गई।
पूर्ववर्ती इंटरमीडिएट सेक्शन के कर्मचारियों के समायोजन की मांग
महासंघ ने विश्वविद्यालयों में पूर्ववर्ती इंटरमीडिएट सेक्शन से जुड़े गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के समायोजन का मुद्दा भी उठाया। संगठन के अनुसार वर्षों से कार्यरत ऐसे कर्मचारियों की योग्यता, अनुभव और सेवा अवधि का परीक्षण कर उपलब्ध एवं स्वीकृत पदों के विरुद्ध नियमानुसार समायोजन या नियोजन की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा
महासंघ ने संविदा कर्मचारियों के लिए सेवा अवधि, कार्य की प्रकृति और योग्यता के आधार पर पारदर्शी वेतन पुनरीक्षण एवं वार्षिक वृद्धि की नीति बनाने की मांग की।
आउटसोर्स कर्मचारियों के संबंध में संगठन ने वित्त विभाग के आदेश संख्या 478, दिनांक 17 फरवरी 2026 में निर्धारित Man-Month Rate लागू करने की मांग की। इसके अलावा नियुक्ति/सेवा पत्र, समय पर वेतन भुगतान, अवकाश, EPF/UAN, ESIC, बोनस, मातृत्व लाभ और अन्य वैधानिक सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की गई।
महासंघ ने वेतन भुगतान में कथित देरी की शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्मचारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
तीन वर्ष या अधिक सेवा वाले कर्मचारियों के लिए नीति की मांग
महासंघ ने कहा कि विश्वविद्यालयों में कई कर्मचारी तीन वर्ष से अधिक समय से लगातार सेवा दे रहे हैं। इनमें कुछ कर्मचारियों के 10 से 15 वर्ष या उससे अधिक समय से काम करने का दावा किया गया।
संगठन की मांग है कि नई नियुक्ति से पहले ऐसे कर्मचारियों की योग्यता, अनुभव, सेवा अवधि, पात्रता और उनके द्वारा किए जा रहे कार्य की प्रकृति का परीक्षण किया जाए। जहां कार्य स्थायी प्रकृति का हो और स्वीकृत अथवा पुनर्संरचित नियमित पद उपलब्ध हों, वहां लागू भर्ती नियम, आरक्षण प्रावधान और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप उनकी नियमित नियुक्ति या स्थायी सेवा के लिए विशेष नीति बनाने पर विचार किया जाए।
विश्वविद्यालयों की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
दोनों महासंघों ने विश्वविद्यालयों में सार्वजनिक धन से होने वाली बड़ी खरीद को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की। संगठन ने कहा कि उपकरण, किताब, कंप्यूटर, सेवाओं और अन्य संसाधनों की खरीद से पहले उनकी वास्तविक आवश्यकता और उपयोगिता का मूल्यांकन होना चाहिए।
महासंघ ने कहा कि सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में वित्तीय नियमों का पालन, पारदर्शी प्रक्रिया और खरीद के बाद उपयोगिता की समीक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
12 प्रमुख मांगों को लेकर संयुक्त संघर्ष
दोनों महासंघों ने 12 प्रमुख मांगों को लेकर संयुक्त संघर्ष का ऐलान किया है। इनमें पात्र कर्मचारियों को ACP/MACP का लाभ, लंबित पदोन्नति, पुनर्संरचित पदों के अनुरूप समायोजन, पूर्ववर्ती इंटरमीडिएट कर्मचारियों का नियमानुसार समायोजन, संविदा कर्मचारियों के वेतन का पारदर्शी पुनरीक्षण, आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए निर्धारित Man-Month Rate, वैधानिक सामाजिक सुरक्षा, समय पर वेतन भुगतान, सेवा अभिलेख और सामाजिक सुरक्षा, तीन वर्ष या अधिक सेवा वाले कर्मचारियों के लिए विधिसम्मत नियमित नियुक्ति की नीति, नियमित गैर-शिक्षकेत्तर भर्ती तथा सार्वजनिक धन एवं प्रशासन में पारदर्शिता शामिल है।
दोनों महासंघों ने कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि नियमसम्मत प्रशासन, पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन, उचित मानव संसाधन व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारियों के वैधानिक एवं न्यायसंगत अधिकारों के लिए होगा।

