
जमशेदपुर। टाटानगर से जयनगर (वाया दरभंगा) चलने वाली ट्रेन संख्या 18119/18120 के परिचालन को लेकर एक बार फिर मांग तेज हो गई है। मिथिला रेल संघर्ष समिति के बैनर तले मिथिलांचल समाज और रेल यात्रियों की ओर से डीआरएम, चक्रधरपुर रेल मंडल (दक्षिण पूर्व रेलवे) को एक स्मार पत्र सौंपते हुए इस साप्ताहिक ट्रेन को सप्ताह में तीन दिन, समय-सारणी के अनुरूप और नए कोच के साथ चलाने की मांग की गई है।

रेल मंत्री और रेलवे प्रशासन के प्रति आभार
स्मार पत्र के माध्यम से कोल्हान क्षेत्र में निवासरत मिथिलांचल के लगभग 3.5 लाख लोगों ने रेलवे प्रशासन और भारत सरकार के माननीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है। पत्र में कहा गया है कि टाटानगर–जयनगर ट्रेन की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष चल रहा था, जिसे पूरा कर रेलवे ने मिथिलांचल समाज को बड़ी सौगात दी है।
शानदार प्रदर्शन, बढ़ती यात्री संख्या
स्मार पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रेन संख्या 18119/18120 अपने परिचालन के बाद से ही बेहतर प्रदर्शन कर रही है। यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और लोगों को इस ट्रेन से आवागमन में काफी सुविधा मिल रही है। ऐसे में सप्ताह में केवल एक दिन का परिचालन यात्रियों की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है।
सप्ताह में तीन दिन परिचालन की जरूरत
मिथिलांचल समाज की ओर से अनुरोध किया गया है कि इस ट्रेन को सप्ताह में कम से कम तीन दिन चलाया जाए। इससे कोल्हान क्षेत्र में रह रहे मिथिलांचल के लोगों को अपने गांव और परिजनों तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। साथ ही यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इससे रेलवे के राजस्व में भी वृद्धि होने की पूरी संभावना है।
नामकरण और सांस्कृतिक जुड़ाव की मांग
पत्र में यह मांग भी दोहराई गई है कि इस ट्रेन का नाम “विद्यापति एक्सप्रेस” या “जनक नंदिनी एक्सप्रेस” रखा जाए, ताकि मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को सम्मान मिल सके। यह नाम न केवल यात्रियों की भावनाओं से जुड़ा है, बल्कि क्षेत्रीय अस्मिता को भी दर्शाता है।
भारत–नेपाल संबंधों को मजबूती
टाटानगर–जयनगर ट्रेन को भारत–नेपाल को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया है। जयनगर से जनकपुर धाम नजदीक स्थित है और वहां से पशुपतिनाथ महादेव तक पहुंचने में लगभग पांच घंटे का समय लगता है। ऐसे में यह ट्रेन भारत–नेपाल संबंधों और सीता–राम कॉरिडोर को मजबूती प्रदान करने में भी अहम भूमिका निभा रही है।
प्रतिनिधिमंडल रहा मौजूद
यह स्मार पत्र मिथिला रेल संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल द्वारा अनूप मिश्रा ज्योति के नेतृत्व में सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल में आकाश चंद्र मिश्र, राज कुमार ठाकुर, रूबी झा, बिनोद झा, माला चौधरी, हरे राम चौधरी, भारत झा, प्रवीण ठाकुर, मालखान दूबे, प्रियंका चौधरी, किरण झा, कल्याणी झा, बिंदु ठाकुर, सबिता ठाकुर, सरिता चौधरी, अनवर अहमद, तस्लीम अंसारी, मोहम्मद सलाउद्दीन, ए.आर.एच. सिद्दीकी, अख्तर आलम सहित कई लोग उपस्थित थे।


