जमशेदपुर।
झारखंड की बेटी संजना कुमारी ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में संजना ने बैडमिंटन के महिला एकल SL3 वर्ग में कांस्य पदक जीतकर देश और झारखंड का मान बढ़ाया। इस प्रतियोगिता में भारतीय पैरा बैडमिंटन खिलाड़ियों ने कुल 16 पदक हासिल किए। संजना की इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 22 अक्टूबर को उन्हें बधाई दी।
संघर्ष और पिता के समर्पण ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
संजना कुमारी का खेल सफर संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। उन्होंने वर्ष 2021 में बहरीन में आयोजित एशिया यूथ पैरा गेम्स से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू की थी। इसके बाद लगातार अभ्यास और प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन के दम पर वह एशियन पैरा गेम्स तक पहुंचीं।
संजना के पिता रतन कुमार पूर्व सैनिक हैं। वर्ष 2017 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने अपनी पेंशन की राशि से लगातार चार वर्षों तक बेटी की ट्रेनिंग का खर्च उठाया। संजना अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और लखनऊ में अपने मुख्य कोच गौरव खन्ना को देती हैं।
जापान की खिलाड़ी से सेमीफाइनल में मुकाबला
महिला एकल SL3 वर्ग के सेमीफाइनल में संजना का मुकाबला जापान की शिनो कवाई से हुआ। इस मुकाबले में जापानी खिलाड़ी ने संजना को 21-7 और 21-9 से हराया। सेमीफाइनल तक पहुंचने के कारण संजना का कांस्य पदक सुनिश्चित हुआ। यह एशियन पैरा गेम्स में उनका पहला पदक है। 23 वर्षीय संजना का कहना है कि उन्हें अपनी क्षमता और एकाग्रता पर अभी और काम करना है। उनका अगला बड़ा लक्ष्य वर्ष 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले पैरालंपिक खेलों में भारत के लिए पदक जीतना है।
अंतरराष्ट्रीय पदक के बाद भी सरकारी सहायता का इंतजार
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बावजूद संजना के परिवार का कहना है कि झारखंड सरकार की ओर से अब तक उन्हें न तो कोई बधाई संदेश मिला है और न ही आर्थिक सहायता। इसको लेकर परिवार और खेल से जुड़े लोगों में निराशा है।
बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ ईस्ट सिंहभूम के पदाधिकारियों ने संजना को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया है। संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को सम्मान और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। खेल संघ के पदाधिकारी इस मुद्दे को मुख्यमंत्री और राज्यपाल के समक्ष उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
संजना की उपलब्धि यह बताती है कि प्रतिभा और मेहनत को सही अवसर मिले तो झारखंड के खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं। अब उम्मीद है कि उनकी सफलता को देखते हुए राज्य में पैरा खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, आर्थिक सहयोग और सम्मान की दिशा में भी ठोस पहल होगी।

