
JAMSHEDPUR
जमशेदपुर: झारखंड हाईकोर्ट के निर्देशानुसार और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DALSA) जमशेदपुर के सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी ने मंगलवार को घाघीडीह सेंट्रल जेल और बाल संप्रेषण गृह (Remand Home) का औचक निरीक्षण किया। इस औचक कार्रवाई से जेल और संप्रेषण गृह प्रबंधन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य बंदियों और बच्चों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं और उनके विधिक अधिकारों की जांच करना था।

घाघीडीह सेंट्रल जेल में खान-पान और रहन-सहन का जायजा
डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी ने सबसे पहले घाघीडीह सेंट्रल जेल का रुख किया। वहां उन्होंने महिला एवं पुरुष बंदियों के बैरकों का दौरा कर उनके रहन-सहन की स्थिति को देखा। इसके साथ ही उन्होंने जेल के मुख्य किचेन (रसोईघर) का भी निरीक्षण किया, जहाँ बंदियों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर जेल प्रशासन को आवश्यक गाइडलाइंस दीं।
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संप्रेषण गृह में बच्चों की सुविधाओं की बारीकी से जांच
जेल के बाद डालसा सचिव सीधे बाल संप्रेषण गृह पहुंचे। यहाँ उन्होंने बच्चों के रहने के कमरे (बेडरूम), उनकी पोशाक, खान-पान की सामग्री और किचेन का बेहद बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने स्टोर रूम में रखी खाद्य सामग्रियों की एक्सपायरी डेट और गुणवत्ता को भी परखा।
स्वास्थ्य, शिक्षा और योग व्यवस्था पर विशेष फोकस
निरीक्षण के दौरान सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी ने बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने प्रबंधन से पूछा कि
बच्चों को फल, दूध और नॉनवेज मीनू के अनुसार समय पर मिलता है या नहीं?
बीमार बच्चों को समय पर दवाइयां और डॉक्टर की सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं?
बच्चों की पढ़ाई का स्तर क्या है और क्लासरूम में उनके बैठने की क्या व्यवस्था है?
इसके अलावा उन्होंने बच्चों के खेल-कूद, मनोरंजन और सुबह के समय योगाभ्यास की व्यवस्था के बारे में भी पूरी जानकारी ली।
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लापरवाही बरतने पर कार्रवाई की सख्त चेतावनी
मौके पर मौजूद संप्रेषण गृह के पदाधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए डालसा सचिव ने कहा कि बच्चों की देखरेख में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया और उन्हें जीवन में अच्छे कर्म कर एक बेहतर नागरिक बनने की नसीहत दी।



