
जमशेदपुर, 26 मई 2026 — महान उर्दू शायर मिर्ज़ा दाग़ देहलवी की जयंती पर अदारा “दबिस्तान-ए-जमशेदपुर” ने सोमवार शाम जवाहर नगर स्थित अपने कार्यालय में एक विशेष शेरी निशस्त (शायरी की महफ़िल) आयोजित की। कार्यक्रम का संचालन संस्था के संरक्षक गौहर अज़ीज़ की अध्यक्षता में हुआ और शायरी के पारखी श्रोताओं ने महफ़िल का भरपूर आनंद लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत
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शेरीनिशस्त की शुरुआत दाग़ देहलवी की मशहूर गज़ल “तुम्हारे खत में नया एक सलाम किसका था” से हुई, जिसे सफीउल्लाह सफ़ी ने भावपूर्ण अंदाज़ में पेश किया। सजीव गायकी एवं वाद्य के साथ गज़ल ने महफ़िल में उपस्थित लोगों के दिलों को छू लिया और कार्यक्रम का टोन स्थापित कर दिया।
शायरों का समागम
महफ़िल में कई प्रतिष्ठित शायरों ने अपनी चुनिंदा रचनाएँ पढ़ीं और श्रोताओं से ज़बरदस्त तालियाँ हासिल कीं। उपस्थित शायरों में गौहर अज़ीज़, वलीउल्लाह वली, सद्दाम गनी, फ़रहान ख़ान फ़रहान, सफ़ीउल्लाह सफ़ी, सकलैन मुश्ताक, शोएब अख़्तर, सफ़दर हारून, हसरत निज़ामी, सरफ़राज़ शाद और सैफ़ अली सैफ़ शामिल थे। हर शायर ने दाग़ के अंदाज़, उनके मकाम और उर्दू शायरी पर उनके असर पर अपने अपने अंदाज़ में प्रकाश डाला।
दाग़ देहलवी का ज़िक्र
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गौहर अज़ीज़ ने मंच से कहा कि दाग़ देहलवी ने उर्दू ज़बान और शायरी दोनों को बेहद समृद्ध किया है। उन्होंने बताया कि आने वाले कई शायर दाग़ की रूहेनी और शैली के उतराधिकारी हैं और दाग़ के साहित्यिक योगदान पर गर्व करते हैं।
सभ्याई व सहभागिता
महफ़िल में युवा और वरिष्ठ दोनों पीढ़ियों के शौक़ीन मौजूद थे। शायरी पर चर्चाएँ, श्रोताओं की प्रतिक्रियाएँ और काव्यात्मक विमर्श माहौल को और समृद्ध करते रहे। कार्यक्रम रात तक चला और अंत में फ़रहान ने धन्यवाद ज्ञापन देकर सबका आभार व्यक्त किया।


