
जमशेदपुर: जमशेदपुर पुलिस ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड दिलाने का झांसा देकर एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) के माध्यम से करीब 3 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड का खुलासा सिटी एसपी ललित मीणा ने एसएसपी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में किया।


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HOPE-HELP FOR ALL FOUNDATION को बनाया निशाना
पुलिस के अनुसार, मामला जमशेदपुर साइबर अपराध थाना कांड संख्या 52/2026 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता रीना पाण्डेय ने बताया कि साइबर अपराधियों ने उनके एनजीओ HOPE-HELP FOR ALL FOUNDATION को CSR फंड उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। इसके लिए एनजीओ के नाम पर एक्सिस बैंक में करंट अकाउंट खुलवाया गया, जिसका बाद में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन के लिए इस्तेमाल किया गया।
जांच में सामने आया सुनियोजित साइबर फ्रॉड
मामले की जांच पुलिस निरीक्षक कृष्णा कुमार ने की। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने पहले सत्यापन के बहाने एनजीओ की चेक बुक, सिम कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। इसके बाद दिसंबर 2025 में वह इन्हें लेकर लखनऊ चला गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अक्टूबर 2025 में ही शिकायतकर्ता की ई-मेल आईडी और इंटरनेट बैंकिंग का एक्सेस अपने मोबाइल में सक्रिय कर लिया था। इसके बाद अपने साथियों के साथ मिलकर मात्र पांच दिनों के भीतर लगभग 3 करोड़ रुपये खाते में जमा कर निकासी कर ली।
आदित्यपुर से गिरफ्तार हुआ मुख्य आरोपी
पुलिस ने मुख्य आरोपी अमन कुमार सिंह उर्फ रघु (29 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। वह मूल रूप से देवरिया (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है और वर्तमान में सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र स्थित ऑरेंज एम्पायर अपार्टमेंट में किराये के मकान में रह रहा था।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से वीवो कंपनी का मोबाइल फोन भी बरामद किया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य साइबर अपराधियों की तलाश में जुटी है तथा बैंक खातों और ट्रांजैक्शन की विस्तृत जांच जारी है।
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पुलिस की अपील: बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें
सिटी एसपी ललित मीणा ने लोगों से अपील की कि CSR फंड, सरकारी अनुदान, चैरिटी फंड या किसी बड़ी आर्थिक सहायता के नाम पर कोई भी व्यक्ति यदि बैंक खाता, चेक बुक, सिम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग, पासवर्ड या ओटीपी जैसी गोपनीय जानकारी मांगता है तो उसे साझा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर थाना या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।


