जमशेदपुर: शहर स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML) में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “अभियांत्रिकीय उपकरणों की शेष आयु आकलन (RLA-2026)” का 10 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी के समापन सत्र में तकनीकी निष्कर्षों, औद्योगिक उपयोगिता और भविष्य की रणनीतियों पर गहन मंथन किया गया।
औद्योगिक ढांचे के ‘जीवन मूल्यांकन’ पर विशेष चर्चा
दो दिनों तक चले इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम ने बॉयलर, टर्बाइन, पाइपलाइन और रिफाइनरी उपकरणों जैसे अति-महत्वपूर्ण औद्योगिक ढांचे के ‘जीवन मूल्यांकन’ (Life Assessment) पर ज्ञान-विनिमय का एक सशक्त मंच प्रदान किया। संगोष्ठी के दौरान विशेषज्ञों ने औद्योगिक संयंत्रों के सुरक्षित, विश्वसनीय और किफायती संचालन को सुनिश्चित करने के लिए उन्नत डायग्नोस्टिक टूल्स, प्रेडिक्टिव मॉडलिंग और समेकित मूल्यांकन तकनीकों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। इसमें क्रीप और स्ट्रेस रप्चर आधारित जीवन मूल्यांकन और जंग (Corrosion) प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित हुए।
सटीक पूर्वानुमान के लिए AI और NDE का एकीकरण जरूरी
समापन सत्र में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि उपकरणों के सटीक जीवन पूर्वानुमान के लिए नॉन-डिस्ट्रक्टिव इवैल्यूएशन (NDE), माइक्रोस्ट्रक्चरल विश्लेषण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डेटा तकनीकों का एकीकरण आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। इसके लिए R&D (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) संस्थानों, शिक्षाविदों और औद्योगिक घरानों के बीच मजबूत सहयोग स्थापित करने पर जोर दिया गया।
पैनल चर्चा: प्लांट उपकरणों की आयु वृद्धि और चुनौतियां
अंतिम दिन डॉ. जितेंद्र कुमार साहू की अध्यक्षता में “प्लांट घटकों की आयु वृद्धि हेतु अनुसंधान एवं विकास आधारित इंजीनियरिंग” विषय पर एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित हुई। इसमें सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी, डॉ. के.के. साहू, एनटीपीसी से श्री ए. समंता, सीपीआरई से डॉ. एस.के. नाथ और एमआरपीएल से श्री के. सतीश ने अपने विचार साझा किए।
चर्चा के दौरान श्री ए. समंता ने बताया कि वर्तमान में बॉयलर की RLA जांच हर 5–6 साल में होती है, लेकिन कई बार जांच के कुछ महीने बाद ही विफलताएं देखने को मिलती हैं, इसलिए उच्च गुणवत्ता वाली रिपोर्टिंग और निरीक्षण की आवृत्ति बढ़ानी चाहिए। डॉ. एस.के. नाथ ने NDT तकनीकों में ऑटोमेशन के साथ गुणवत्ता बनाए रखने की बात कही, जबकि श्री सतीश ने खराब डेटा क्वालिटी के कारण RLA सॉफ्टवेयर रिपोर्टों में आने वाली असंगतियों पर चिंता जताई।
इंडस्ट्रियल PhD (iPhD) और भविष्य की रणनीतियां
पैनल ने सामग्री चयन और ‘हार्ड कोटिंग्स’ में और अधिक शोध की आवश्यकता बताई, क्योंकि मौजूदा कोटिंग तकनीकें कमजोर बॉन्ड स्ट्रेंथ के कारण जल्दी विफल हो जाती हैं। उद्योग में ‘कौशल अंतर’ को पाटने के लिए RLA सर्टिफिकेट कोर्स और इंडस्ट्रियल PhD (iPhD) प्रोग्राम शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा गया, जो उद्योगों की वास्तविक समस्याओं के समाधान पर केंद्रित होगा।
सफल आयोजन पर दी गई बधाई
कार्यक्रम के अंत में सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने सभी प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की और संस्थान की अनुसंधान के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार साहू तथा संयोजक डॉ. सुमंत बागुई और डॉ. कृष्णा गुगुलोथ ने आयोजन की सफलता पर खुशी व्यक्त की। अंत में डॉ. कृष्णा गुगुलोथ के धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का विधिवत समापन हुआ।





