
जमशेदपुर.
सैरात दुकानों का किराया बढ़ाए जाने को लेकर व्यापारी वर्ग लगातार विरोध जता रहा है. व्यापारियों का कहना है कि पहले से ही बाजार में मंदी का दौर चल रहा है और व्यापार प्रभावित है. ऐसे समय में बिना किसी पूर्व सूचना या व्यापारियों से चर्चा किए JNAC (जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी) द्वारा किराया बढ़ाने का निर्णय लिया जाना अनुचित है. व्यापारियों के अनुसार इस फैसले से हजारों छोटे दुकानदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ जाएगा.
जवाहरलाल शर्मा ने उठाए कानूनी सवाल
मानवाधिकार कार्यकर्ता और जमशेदपुर में तीसरे मताधिकार की लड़ाई लड़ रहे जवाहरलाल शर्मा ने भी इस फैसले का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने एक प्रेस रिलीज जारी कर सवाल उठाया है कि जब JNAC स्वयं एक असंवैधानिक संस्था है तो वह सैरात दुकानों का किराया बढ़ाने जैसा फैसला कैसे ले सकती है. शर्मा ने कहा कि इस निर्णय से जमशेदपुर के लगभग 7,700 से अधिक दुकानदार सीधे प्रभावित होंगे. उनका आरोप है कि सैरात कानून के तहत मनमाने तरीके से किराया बढ़ाया गया है, जो न्यायसंगत नहीं है.
नगर निगम गठन का मुद्दा
प्रेस रिलीज में जवाहरलाल शर्मा ने कहा कि संविधान संशोधन के बाद JNAC का अस्तित्व समाप्त हो जाना चाहिए था. उनके अनुसार इसके स्थान पर जनता द्वारा चुनी गई संस्था यानी नगर निगम को ही ऐसे फैसले लेने का अधिकार होना चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि जमशेदपुर में नगर निगम के गठन का मुद्दा वर्षों से लंबित है और इसी कारण प्रशासनिक व्यवस्था में कई तरह की समस्याएं पैदा हो रही हैं.
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला
शर्मा ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में इंडस्ट्रियल टाउन बनाम नगर निगम से संबंधित मामला अभी भी चल रहा है. उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1989 में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने जमशेदपुर में नगर निगम बनाने का फैसला दिया था और इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी किया गया था.
हालांकि उनका आरोप है कि टाटा कंपनी और राज्य सरकारों की मिलीभगत के कारण अब तक नगर निगम का गठन नहीं हो पाया है. इस कारण जमशेदपुर के लाखों नागरिक अपने संवैधानिक मतदान अधिकार से वंचित हैं.
अन्य क्षेत्रों में चुनाव, जमशेदपुर में अधिकार से वंचित जनता
उन्होंने कहा कि हाल ही में मानगो और जुगसलाई में संविधान के तहत चुनाव कराए गए और वहां की जनता ने अपने मेयर का चुनाव किया. लेकिन जमशेदपुर के लोग आज भी इस अधिकार से वंचित हैं. शर्मा का कहना है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और बुद्धिजीवियों की चुप्पी भी चिंताजनक है.
दुकानदारों से सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप की अपील
जवाहरलाल शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे इस जनहित याचिका (PIL) मामले में कुछ लोग इंटरवेनर के रूप में शामिल हो चुके हैं ताकि केस को मजबूती मिल सके. उन्होंने कहा कि यह संघर्ष पिछले करीब 40 वर्षों से चल रहा है. उन्होंने दुकानदारों के प्रतिनिधियों से भी अपील की है कि वे इस मामले में इंटरवेनर बनकर सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी समस्याएं रखें, जिससे जनता के अधिकारों की लड़ाई को और मजबूती मिल सके.



