जमशेदपुर। महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में मंगलवार की शाम साकची गोलचक्कर के समीप एक विशाल नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया। इस सभा की अध्यक्षता कांग्रेस के जिलाध्यक्ष परविंदर सिंह ने की। सभा के दौरान कांग्रेस नेताओं ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि विपक्ष ने भाजपा की ‘गलत मंशा’ को रंगे हाथों पकड़ लिया है।
जनगणना और परिसीमन के नाम पर जानबूझकर हो रही देरी
नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष परविंदर सिंह ने कहा कि महिला आरक्षण बिल का मूल उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करना है। केंद्र सरकार ने 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लाकर सिर्फ श्रेय लूटने का प्रयास किया है। कांग्रेस का सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिल पास होने के बाद भी इसे तुरंत लागू क्यों नहीं किया गया? सरकार ने इसे जनगणना (Census) और परिसीमन (Delimitation) की शर्त के साथ जोड़ दिया है, जिससे इसके लागू होने में कई वर्षों की देरी होना तय है। कांग्रेस की मांग है कि अगर सरकार महिलाओं के प्रति सच में गंभीर है, तो इसे बहानेबाजी छोड़कर अगले चुनाव से ही लागू करे।
ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से सब-कोटा क्यों नहीं?
कांग्रेस नेताओं ने इस बिल में सामाजिक न्याय की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस 33% आरक्षण में ओबीसी (OBC) महिलाओं के लिए अलग से कोई सब-कोटा (sub-quota) नहीं दिया गया है। कांग्रेस का तर्क है कि इस प्रावधान के अभाव में केवल सामान्य वर्ग की महिलाएं ही अधिक लाभ उठा पाएंगी, जबकि पिछड़े वर्ग की महिलाओं को भी आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। सामाजिक न्याय के बिना महिला न्याय पूरी तरह से अधूरा है।
मनमोहन सरकार में ही पास हो गया था बिल
भाजपा के इन आरोपों पर कि कांग्रेस ने महिला आरक्षण का विरोध किया था, पलटवार करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से इसकी पुरानी और मजबूत समर्थक रही है। मार्च 2010 में डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के समय ही इस ऐतिहासिक बिल को राज्यसभा में सफलतापूर्वक पारित करा लिया गया था। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सिर्फ चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए दिखावा कर रही है, जबकि इसके लागू होने की कोई स्पष्ट तारीख तय नहीं है।
परिसीमन और रोटेशन सिस्टम से राजनीतिक अस्थिरता का खतरा
सभा में परिसीमन से होने वाले संभावित नुकसान पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन से दक्षिण भारत और जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहने वाले राज्यों को भारी नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, आरक्षित सीटों के ‘रोटेशन सिस्टम’ को लेकर भी सवाल खड़े किए गए। बार-बार आरक्षित सीटें बदलने से कोई भी सांसद अपने क्षेत्र में लंबे समय तक विकास कार्य नहीं कर पाएगा, जिससे विकास कार्य बाधित होंगे। निष्कर्ष के तौर पर कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध बिल से नहीं, बल्कि इसके मौजूदा ढांचे और लागू करने में हो रही अनावश्यक देरी से है।
नुक्कड़ सभा में इन नेताओं की रही प्रमुख उपस्थिति
इस विरोध प्रदर्शन और नुक्कड़ सभा में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह, जसवंत सिंह जस्सी, गुरदीप सिंह, अंसार खान, अशोक सिंह क्रांतिकारी, रंजीत सिंह, राजकिशोर प्रसाद, सुल्तान अहमद, राकेश साहू, दुर्गा प्रसाद, बबलू नौशाद, लक्की शर्मा, राजकुमार वर्मा, हरेकृष्ण लोहार, बंटी पाण्डेय, मुन्ना मिश्रा, शैलेन्द्र कुमार, जे एस पदरी, नवनीत मिश्रा, आशीष ठाकुर, मकसूद आलम, ईशान पात्रा, रीता शर्मा, आशुतोष सिंह, कौशल प्रधान, फिरोज खान, बलदेव सिंह, रजनी बंसल, गुरदीप सिंह सोहल, नमिता सिंह और संजय सिंह आजाद मुख्य रूप से उपस्थित रहे।





