
JAMSHEDPUR
पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक सफल सिविल डिफेंस एयर रेड मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास किसी भी संभावित हवाई हमले (एयर रेड) या बड़ी आपदा के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों की सजगता, आपसी तालमेल और खोज व बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू) क्षमताओं को परखने के लिए किया गया। यह मॉक ड्रिल जमशेदपुर के सीएच एरिया स्थित महारानी मेंशन में आयोजित की गई।

जिला कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग और विभागों को अलर्ट
दोपहर ठीक 4:00 बजे जैसे ही एयर रेड (हवाई हमले) की सूचना मिली, प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आ गया। जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त राजीव रंजन साकची थाना स्थित जिला कंट्रोल रूम पहुंचे। उन्होंने वहीं से पूरे ऑपरेशन की कमान संभाली और स्थिति की पल-पल की जानकारी ली।
कंट्रोल रूम में उनके साथ सिटी एसपी ललित मीणा, अनुमंडल पदाधिकारी धालभूम अर्नव मिश्रा और सिविल डिफेंस के नोडल पदाधिकारी समेत कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। आपात स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कंट्रोल रूम से अग्निशमन सेवा, पुलिस, यातायात पुलिस, आपदा प्रबंधन विभाग और स्वास्थ्य विभाग जैसी महत्वपूर्ण एजेंसियों को तत्काल अलर्ट भेजा गया।
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सायरन बजते ही शुरू हुआ सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन
सीएच एरिया स्थित महारानी मेंशन में अपराह्न 4:05 बजे सायरन बजते ही राहत एवं बचाव अभियान की शुरुआत हो गई। निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत सिविल डिफेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस और मेडिकल टीमों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला।
मॉक ड्रिल के दौरान मलबे में फंसे लोगों को निकालने, आग पर काबू पाने और प्राथमिक चिकित्सा देने का जीवंत अभ्यास किया गया। दोपहर 4:13 बजे उपायुक्त राजीव रंजन और सिटी एसपी ललित मीणा ने खुद घटनास्थल पर पहुंचकर राहत-बचाव कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया और टीम को जरूरी निर्देश दिए।
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25 मिनट चला अभियान, घायलों को पहुंचाया गया अस्पताल
लगभग 25 मिनट तक चले इस सघन रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सभी ‘घायल’ और प्रभावित व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर ही फर्स्ट एड दिया और गंभीर रूप से प्रभावित लोगों को एंबुलेंस के जरिए तुरंत अस्पताल रवाना किया।
उपायुक्त ने बताया कि इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा या युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, रिस्पांस टाइम को कम करना और उपलब्ध संसाधनों की वास्तविक तैयारी का आकलन करना था, ताकि भविष्य में किसी भी वास्तविक संकट के समय जान-माल का नुकसान कम से कम हो।




