
जमशेदपुर के साकची झंडा चौक पर सिखों के पांचवें गुरु और शहीदों के सरताज गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस को समर्पित एक भव्य छबील का आयोजन किया गया। इस धार्मिक और सेवा कार्य में स्थानीय सिख दुकानदारों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भीषण गर्मी को देखते हुए साकची के मुख्य चौक पर आम राहगीरों और वाहन चालकों के बीच ठंडे मीठे शर्बत और चने के प्रसाद का वितरण किया गया।
साकची गुरुद्वारा कमेटी ने बढ़ाया युवाओं का हौसला
इस सेवा कार्य और युवाओं की हौंसला आफजाई करने के लिए साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान निशान सिंह, बलबीर सिंह, त्रिलोक सिंह और श्याम सिंह भाटिया विशेष रूप से साकची झंडा चौक पहुंचे। कमेटी के पदाधिकारियों ने न केवल युवाओं का उत्साह बढ़ाया, बल्कि खुद भी अरदास में शामिल होकर संगत की सेवा की। इस दौरान बाबा दलजीत सिंह ने सरबत के भले (समस्त जीवों के कल्याण) की अरदास की, जिसके बाद प्रसाद और शर्बत का वितरण तेजी से शुरू हुआ।
इन सेवादारों ने निभाई मुख्य भूमिका
साकची झंडा चौक पर आयोजित इस छबील को सफल बनाने में स्थानीय युवाओं और सेवादारों का विशेष योगदान रहा। सेवा कार्य में मुख्य रूप से सतबीर सिंह गोल्डू, तलविंदर सिंह पोली, अमरजीत सिंह बबलू, हरमीत सिंह, सुरेंद्र सिंह, राज्जी, कल्लू, शंकू, चंचल, हन्नी सिंह और ट्विंकल सिंह आदि ने अपनी सेवाएं दीं। दोपहर की तपती धूप में इन सेवादारों ने हजारों राहगीरों को ठंडा शर्बत पिलाकर राहत पहुंचाई।
गुरु अर्जन देव जी की महान शहादत का इतिहास
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उल्लेखनीय है कि सिखों के पांचवें गुरु, गुरु अर्जन देव जी की शहादत का इतिहास अत्यंत दर्दनाक और प्रेरणादायी है। मुगल बादशाह जहांगीर के आदेश पर लाहौर में ‘यशा कानून’ के तहत गुरु महाराज को बेहद क्रूर यातनाएं देकर शहीद किया गया था। उन्हें धधकते हुए गर्म लोहे के तवे पर बैठाया गया और उनके पावन शरीर पर तपती हुई रेत डाली गई।
इतना ही नहीं, उन्हें खौलते हुए पानी के बड़े बर्तन (कड़ाहे) में भी डाला गया था। इन अमानवीय यातनाओं के कारण उनका पूरा शरीर काला पड़ गया था और अत्यधिक गर्मी की वजह से शरीर का पूरा खून सूख कर काला हो गया था। इस महान और सर्वोच्च बलिदान की याद में ही हर साल सिख कौम द्वारा जगह-जगह ठंडे शर्बत की छबील लगाई जाती है, जो शांति और सेवा का संदेश देती है।


