जमशेदपुर: कहते हैं जब महादेव का बुलावा आता है, तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं। इसी संकल्प और अदम्य साहस के साथ लौहनगरी जमशेदपुर के राहरगोड़ा निवासी युवा राइडर आशीष झा ने अपने साथी विष्णु शर्मा के साथ भारत के पावन 12 ज्योतिर्लिंगों की 50 दिवसीय बाइक यात्रा का शंखनाद किया है। रविवार को शहर से रवाना होते समय इन युवाओं के चेहरे पर अटूट विश्वास और भगवान शिव के प्रति अगाध श्रद्धा झलक रही थी। उनकी इस महायात्रा के प्रस्थान के अवसर पर राहरगोड़ा स्थित उनके आवास और रवानगी स्थल पर परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों ने माला पहनाकर और तिलक लगाकर उन्हें मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं।
12 हजार किलोमीटर से अधिक का होगा यह चुनौतीपूर्ण सफर
लगभग 50 दिनों तक चलने वाली इस चुनौतीपूर्ण और साहसिक यात्रा में करीब 12 हजार से अधिक किलोमीटर की दूरी तय होने का अनुमान है। इस महायात्रा के दौरान आशीष और विष्णु देश के अलग-अलग राज्यों के दुर्गम रास्तों को नापते हुए शिवधामों में मत्था टेकेंगे। इस आध्यात्मिक सफर में वे न केवल कठिन रास्तों को पार करेंगे, बल्कि देश के कोने-कोने में सनातन संस्कृति और साहसिक जीवनशैली का संदेश भी पहुंचाएंगे।
सनातन संस्कृति और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का लक्ष्य
युवा राइडर आशीष झा ने बताया कि इस यात्रा के माध्यम से वे भारत की भौगोलिक विविधता और सांस्कृतिक एकता को करीब से अनुभव करना चाहते हैं। यह यात्रा उनके लिए केवल एक एडवेंचर ट्रिप नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को भारतीय संस्कृति, धार्मिक पर्यटन और साहसिक जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। उनके इस साहसिक कदम की पूरे जमशेदपुर शहर में जमकर सराहना हो रही है। विशेषकर राहरगोड़ा क्षेत्र के लोगों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात बताया है।
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देवघर से केदारनाथ तक: कुछ ऐसा होगा 12 ज्योतिर्लिंगों का रूट
जमशेदपुर के इन जांबाज राइडर्स आशीष झा और विष्णु शर्मा की यह 50 दिवसीय बाइक यात्रा किसी कठिन तपस्या से कम नहीं है। उनकी इस यात्रा का रूट कुछ इस प्रकार तय किया गया है:
झारखंड और उत्तर प्रदेश: यात्रा का श्रीगणेश झारखंड के गौरव बाबा वैद्यनाथ (देवघर) में जलाभिषेक के साथ होगा। इसके बाद वे उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करेंगे।
मध्य भारत की परिक्रमा: यहां से यह सफर मध्य प्रदेश के हृदय स्थल की ओर मुड़ेगा। शिप्रा नदी के तट पर स्थित महाकालेश्वर (उज्जैन) और नर्मदा किनारे बसे ओंकारेश्वर में मत्था टेकने के बाद वे महाराष्ट्र की ओर प्रस्थान करेंगे।
महाराष्ट्र के तीन पड़ाव: पश्चिम भारत में प्रवेश करते ही सबसे पहले भीमाशंकर की पहाड़ियों को नापा जाएगा। जिसके बाद नासिक स्थित त्रयंबकेश्वर और फिर एलोरा के समीप घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन होंगे।
दक्षिण की ओर बढ़ते कदम: महाराष्ट्र की यह यात्रा सह्याद्री पर्वत श्रृंखलाओं के बीच रोमांच से भरी होगी। इसके बाद आशीष दक्षिण भारत का रुख करेंगे। कृष्णा नदी के तट पर बसे मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश) का दर्शन करने के बाद यह सफर देश के अंतिम छोर तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम पहुंचेगा।
पश्चिम से हिमालय की ऊंचाई तक: रामेश्वरम में समुद्र तट पर पूजा-अर्चना के बाद यह यात्रा पश्चिम की ओर मुड़ेगी। गुजरात के समुद्र तट पर बसे प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ और द्वारका स्थित नागेश्वर का आशीर्वाद लेने के बाद ये राइडर्स सीधे हिमालय की वादियों का रुख करेंगे।
केदारनाथ में पूर्णाहूति: इस 50 दिवसीय महायात्रा का भव्य समापन उत्तराखंड की दुर्गम पहाड़ियों में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट पर होगा, जहां बाबा केदार के जलाभिषेक के साथ इस महान संकल्प की पूर्णाहूति होगी।





