जमशेदपुर: औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में जल प्रदूषण का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। नदियों में मछलियों के मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले महीने ही शहर के दो अलग-अलग स्थानों पर मछलियों के मरने की घटना सामने आई थी। अब रविवार को डोबो पुल के नीचे जीवनदायिनी स्वर्णरेखा नदी में हजारों की संख्या में मरी हुई मछलियां पाई गई हैं। इस घटना ने एक बार फिर शहर की नदियों के बढ़ते प्रदूषण स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार तड़के करीब तीन बजे जब स्थानीय मछुआरे स्वर्णरेखा नदी में मछली पकड़ने पहुंचे, तो उन्हें जाल फेंकने की जरूरत ही नहीं पड़ी। हजारों की संख्या में मृत मछलियां पानी के ऊपर तैर रही थीं, जिन्हें मछुआरों ने सीधे हाथों से ही निकाल लिया।
घटनास्थल पर मची मृत मछलियां ले जाने की होड़
इस भीषण जल त्रासदी की जानकारी मिलते ही नदी तट पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों के बीच मृत मछलियों को बटोरने और घर ले जाने की होड़ मच गई। बिना यह जाने कि इन मछलियों की मौत किस जहरीले रसायन या दूषित पानी के कारण हुई है, लोग इन्हें अपने साथ ले गए। इससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है। घटना की जानकारी जनता दल (यूनाइटेड) के सोनारी मंडल अध्यक्ष चुन्नू भूमिज ने जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय को दी। सूचना मिलते ही सरयू राय घटनास्थल पर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे, लेकिन तब तक अधिकांश मृत मछलियां लोग वहां से ले जा चुके थे और किनारे पर केवल कुछ ही मछलियां बची थीं।
सीवेज का दूषित पानी और जलकुंभी है मुख्य कारण
घटनास्थल का बारीकी से मुआयना करने के बाद विधायक सरयू राय ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि मछलियां बहुत बड़े पैमाने पर मरी हैं। जहां यह घटना हुई है, ठीक उसी के बगल में सोनारी की तरफ से आने वाला एक बड़ा सीवेज नाला सीधे नदी में गिर रहा है। सरयू राय ने पिछली सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि पांच साल पहले तत्कालीन मंत्री ने इस इलाके में जल शोधन के नाम पर दो-तीन कुंड बनवाए थे, जिसका उस समय भारी प्रचार-प्रसार किया गया था। राय ने कहा कि उन्होंने उसी वक्त चेतावनी दी थी कि यह योजना धरातल पर काम नहीं करेगी। आज वे सभी कुंड और तालाबनुमा गड्ढे गंदगी का मुख्य स्रोत बन चुके हैं। उन गड्ढों में सड़ा हुआ गंदा पानी जमा है, जो ओवरफ्लो होकर सीधे स्वर्णरेखा नदी में मिल रहा है।
उन्होंने आगे बताया कि नदी के आस-पास प्रचुर मात्रा में उग आई जलकुंभी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि घरों और कारखानों से निकलने वाला अत्यधिक दूषित पदार्थ पानी में घुल रहा है। जलकुंभी आमतौर पर उसी पानी में तेजी से पनपती है जहां प्रदूषण और रसायनों की मात्रा बहुत अधिक होती है। इस सीवेज के माध्यम से कोई न कोई ऐसा खतरनाक जहरीला पदार्थ नदी में आ रहा है, जो सीधे तौर पर जलीय जीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
जांच और सार्वजनिक जवाबदेही की मांग
सरयू राय ने कड़े शब्दों में कहा कि शहर भर की गंदगी और सीवेज का पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे स्वर्णरेखा नदी में बहाया जा रहा है, जो एक बड़ा पर्यावरणीय अपराध है। विडंबना यह है कि इसी जहरीले और प्रदूषित पानी में आम लोग और बच्चे रोजाना नहा रहे हैं। यह अंदाजा लगाना बेहद डरावना है कि इस दूषित जल का उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर कितना खतरनाक और जानलेवा प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने मांग की है कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, टाटा स्टील प्रबंधन और जमशेदपुर नगर पालिका को तुरंत इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। इन सभी जिम्मेदार एजेंसियों को पानी के सैंपल लेकर उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए। जांच पूरी होने के बाद प्रशासन को पारदर्शी तरीके से जनता को यह बताना चाहिए कि आखिर इन हजारों मछलियों की मौत के पीछे का असली वैज्ञानिक कारण क्या है और भविष्य में नदियों को बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।




