
जमशेदपुर: झारखंड के राजनीतिक गलियारों में प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्रों के मुद्दों को लेकर घमासान तेज हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), पूर्वी सिंहभूम के जिला अध्यक्ष विक्टर सोरेन ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य के छात्रों की मांगों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए दोषियों पर कार्रवाई और समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। इसके बावजूद JPSC 11वीं–13वीं, FSO, JSSC-CGL और CDPO से जुड़े मामलों में न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों और स्थगन को राजनीतिक रंग देना पूरी तरह दुर्भाग्यपूर्ण है।


अदालत के मामलों को राजनीतिक हथियार बनाना दुर्भाग्यपूर्ण
न्यायालय का अधिकार: झामुमो नेता ने स्पष्ट किया कि न्यायालय में लंबित मामलों का फैसला अदालत करेगी, लेकिन भाजपा इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक मुद्दा बनाकर युवाओं के आक्रोश को भड़काने का प्रयास कर रही है। छात्रों के नाम पर राजनीति करने वालों को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे वास्तव में छात्रों के हितैषी हैं या अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं।
दौरा चरित्र पर सवाल: विक्टर सोरेन ने भाजपा के कथित दोहरे चरित्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ पार्टी लोकतंत्र और युवाओं के अधिकारों की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ रोजगार और परीक्षाओं से जुड़े आंदोलनों पर राजनीति करने से बाज नहीं आ रही है।
छात्रों का भविष्य किसी राजनीतिक दल का स्वार्थ नहीं
झामुमो जिला अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा के इशारे पर मुख्यमंत्री का पुतला दहन और युवाओं के मुद्दों को राजनीतिक टकराव में बदलने की कोशिश तुरंत बंद होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड का युवा पूरी तरह जागरूक है और वह यह अच्छी तरह जानता है कि उसके संघर्ष के साथ कौन खड़ा है और कौन इसका राजनीतिक लाभ उठाना चाहता है। झारखंड के युवाओं को डर नहीं, बल्कि परीक्षा और रोजगार में समाधान व अवसर चाहिए।



