
जमशेदपुर।

झारखंड की लौहनगरी जमशेदपुर के मोहरदा स्थित मां पीताम्बरा मंदिर में शुक्रवार सुबह एक अद्भुत और अलौकिक आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार तीन दिनों तक माता के विश्राम के बाद चौथे दिन मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलते ही पूरा परिसर ‘जय मां पीताम्बरा’ के जयकारों से गूंज उठा। इस पवित्र अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और महाभंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने माता का आशीर्वाद लिया।
विधि-विधान से हुई गणेश और पीताम्बरा मां की महापूजा
बिरसानगर जोन नंबर-2बी स्थित मां पीताम्बरा शक्ति पीठ (तोयात्मा सेवा सदन के अंतर्गत) में शुक्रवार की सुबह सबसे पहले पूरे मंदिर परिसर की शुद्धिकरण और साफ-सफाई की गई। इसके पश्चात पंडित मणीशंकर के आचार्यत्व में यजमान स्वामी विजयानंद महाराज ने अपनी पत्नी सोमा घोषल के साथ पूरे वैदिक विधि-विधान से भगवान गणेश और मां पीताम्बरा की महापूजा संपन्न की। सुबह 10 बजे मुख्य अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद आम भक्तों के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए गए, जिसके बाद दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं।
महाप्रसाद पाने के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
विशेष पूजा संपन्न होने के बाद दोपहर में भव्य भंडारे का आयोजन हुआ। माता के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर महाप्रसाद ग्रहण किया। इस पूरे धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में अभय घोषाल, कृष्ण मोहन सिंह, बाबुलाल गोप, लालदेव, प्रकाश सिंह, तोषी सिंह और विजय रविदास सहित स्थानीय भक्तों ने बेहद सक्रिय भूमिका निभाई। दिन भर मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक चर्चाओं का दौर चलता रहा।
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क्या है 3 दिन कपाट बंद रहने का रहस्य?
भारतीय शक्ति परंपरा में इस तीन दिवसीय अवकाश का बड़ा महत्व है। असल में यह परंपरा असम के गुवाहाटी स्थित विश्व प्रसिद्ध कामाख्या सिद्धपीठ से जुड़ी है। मान्यता है कि साल में एक बार इन तीन दिनों के दौरान भगवती विश्राम करती हैं (अंबुबाची योग)। इस अवधि में गर्भगृह पूरी तरह बंद रहता है और कोई भी मांगलिक या दैनिक पूजा नहीं होती। इसी शाक्त परंपरा का निर्वहन करते हुए जमशेदपुर के मोहरदा स्थित इस मां पीताम्बरा मंदिर के पट भी तीन दिनों के लिए बंद रखे गए थे, जिन्हें चौथे दिन पूरी भव्यता के साथ खोला गया।



