
जमशेदपुर, । इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वेल्डिंग (IIW) जमशेदपुर शाखा ने सीएसआईआर–राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR–NML) के सहयोग से बुधवार को ब्रांच स्तर श्रेष्ठ वेल्डर प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता – श्रेष्ठ से श्रेष्ठ वेल्डर–2025 का हिस्सा रहा और इसे सीएसआईआर–इंटीग्रेटेड स्किल इनिशिएटिव के अंतर्गत आयोजित किया गया।


इस वर्ष का आयोजन खास रहा क्योंकि यह सीएसआईआर–एनएमएल के प्लैटिनम जुबली वर्ष का हिस्सा था। 75 वर्षों की इस गौरवशाली यात्रा का उत्सव मनाया गया और प्रयोगशाला को “अनुसंधान, शिक्षा और ज्ञान का मंदिर” के रूप में याद किया गया, जिसका उद्घाटन देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था।
मुख्य अतिथि का संबोधन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री वी. पी. ठाकुर (टाटा स्टील) ने वेल्डिंग तकनीक की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अवसंरचना की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में आधुनिक वेल्डिंग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
डॉ. के. एल. साहू, डॉ. आनंद प्रभाकरण और श्री यू. बी. राव ने अपने विचार साझा करते हुए ऊर्जा दक्षता, नवाचार और कौशल विकास की आवश्यकता पर बल दिया।
आयोजन की जिम्मेदारी और सहयोग
इस प्रतियोगिता का संयोजन सीएसआईआर–एनएमएल के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अतनु दास ने किया। आयोजन में सुश्री वाई. उषा, श्री रोशन कुमार और इंजीनियरिंग डिवीजन की टीम का विशेष सहयोग रहा।
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प्रतियोगिता और मूल्यांकन
प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन डॉ. मयूरी मंडल (एनआईटी जमशेदपुर) और श्री आसिफ इकबाल (टीआरएफ) ने किया। प्रतियोगिता के विजेताओं को अब राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की वेल्डिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा।
भविष्य की ओर कदम
कार्यक्रम की खासियत यह रही कि प्रतिभागियों को रोबोटिक वेल्डिंग और ऑगमेंटेड रियलिटी वेल्डिंग सिस्टम जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का प्रत्यक्ष अनुभव भी कराया गया। यह अनुभव प्रतिभागियों के लिए न केवल तकनीकी ज्ञान बढ़ाने वाला रहा, बल्कि उन्हें भविष्य की इंडस्ट्री 4.0 आवश्यकताओं के लिए तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।
आयोजकों ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है। इसका उद्देश्य एक ऐसा कुशल कार्यबल तैयार करना है, जो देश की उभरती अवसंरचना जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो।
जमशेदपुर में आयोजित यह प्रतियोगिता न केवल कौशल विकास का मंच बनी, बल्कि नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता की नई राह भी प्रशस्त की।


