
रांची। मिनिस्ट्री ऑफ डोनर (DoNER) और नॉर्थ ईस्ट काउंसिल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अष्टलक्ष्मी यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम का अरुणाचल प्रदेश में सफलतापूर्वक समापन हो गया। लगभग 14 दिनों तक चले इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए युवाओं ने पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक विविधता और सामाजिक जीवन को करीब से समझने का अवसर प्राप्त किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य देश के युवाओं को पूर्वोत्तर राज्यों की संस्कृति, इतिहास और विकास से परिचित कराना तथा “विविधता में एकता” की भारतीय भावना को मजबूत करना था।
अकादमिक सत्र और फील्ड विजिट से मिली नई जानकारी
अष्टलक्ष्मी यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के दौरान प्रतिभागियों के लिए कई अकादमिक सत्र, फील्ड विजिट, सांस्कृतिक कार्यक्रम और संवाद सत्र आयोजित किए गए। इन गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को पूर्वोत्तर राज्यों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामाजिक संरचना, परंपराओं और विकास की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
इसके अलावा प्रतिभागियों ने स्थानीय लोगों के साथ बातचीत कर उनकी जीवनशैली, संस्कृति और परंपराओं को भी करीब से जाना। इससे युवाओं को भारत की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को समझने का बेहतर अवसर मिला।
अरुणाचल प्रदेश के आतिथ्य की सराहना
कार्यक्रम के दौरान अरुणाचल प्रदेश सरकार और आयोजन समिति द्वारा प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उत्कृष्ट व्यवस्था और सहयोग के कारण यह कार्यक्रम सभी प्रतिभागियों के लिए बेहद सफल और यादगार साबित हुआ।
इस अवसर पर झारखंड राज्य के नोडल ऑफिसर तथा पूरे झारखंड प्रतिनिधिमंडल की ओर से अरुणाचल प्रदेश सरकार, आयोजन समिति और कार्यक्रम से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
झारखंड के छात्र सुरक्षित लौटे रांची
कार्यक्रम के समापन के बाद झारखंड राज्य के सभी छात्र प्रतिभागी अपने नोडल ऑफिसर डॉ. त्रिपुरा झा के साथ 3 मार्च 2026 को सकुशल रांची हवाई अड्डा पहुंचे। प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम युवाओं को देश के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।
राष्ट्रीय एकता को मिला बढ़ावा
अष्टलक्ष्मी यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम ने देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच आपसी समझ, सांस्कृतिक समन्वय और भाईचारे की भावना को और मजबूत किया है। प्रतिभागियों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह कार्यक्रम युवाओं के लिए न केवल सीखने का अवसर बना, बल्कि उन्हें भारत की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को समझने का भी एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।



