
जमशेदपुर। झारखंड और आसपास के जंगलों से गुजरने वाली रेलवे लाइनों पर हाथियों की आवाजाही के दौरान दुर्घटनाओं को रोकने के लिए दक्षिण पूर्व रेलवे ने लोको पायलटों को विशेष प्रशिक्षण दिया है। टाटानगर रेल सिविल डिफेंस टीम की ओर से इलेक्ट्रिक लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर के सभागार में आयोजित एक दिवसीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम में चार रेल मंडलों के कुल 286 वरिष्ठ और सहायक लोको पायलट शामिल हुए।
प्रशिक्षण में लोको पायलटों को रेलवे ट्रैक पर हाथी दिखाई देने की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों के साथ आपातकालीन बचाव, सीपीआर, प्राथमिक उपचार और अग्निशमन की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
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हाथी दिखने पर क्या करें लोको पायलट? बताए गए सुरक्षा के गोल्डन रूल
प्रशिक्षण के दौरान सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर एवं राष्ट्रपति सम्मानित सदस्य संतोष कुमार ने बताया कि दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर, खड़गपुर, रांची और आद्रा मंडलों में ऐसे रेलखंड हैं, जहां हाथियों की आवाजाही होती है।उन्होंने लोको पायलटों को हाथियों की सुरक्षा से जुड़े गोल्डन रूल की जानकारी दी। बताया कि रेलवे ट्रैक पर हाथी दिखाई देने पर निर्धारित परिचालन नियमों और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना आवश्यक है।ऐसी स्थिति में परिस्थितियों के अनुसार ट्रेन की गति नियंत्रित करने और संबंधित रेल अधिकारियों को तत्काल सूचना देने पर विशेष जोर दिया गया।
संतोष कुमार ने कहा कि रेल प्रशासन हाथी प्रभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर सुरक्षा उपाय लागू करता है। ऐसे रेलखंडों में निर्धारित गति सीमा और अन्य परिचालन निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
आखिर रेलवे ट्रैक पर क्यों आते हैं हाथी?
प्रशिक्षण में हाथियों के रेलवे ट्रैक तक पहुंचने के कारणों की भी जानकारी दी गई।संतोष कुमार ने बताया कि कई रेलवे लाइनें हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों से होकर गुजरती हैं। भोजन और पानी की तलाश में हाथी अपने पुराने रास्तों का उपयोग करते हैं, जिससे वे रेलवे ट्रैक तक पहुंच जाते हैं।इसके अलावा रात में कम दृश्यता और जंगल के ऊबड़-खाबड़ रास्तों की तुलना में रेलवे ट्रैक का अपेक्षाकृत समतल होना भी हाथियों के ट्रैक पर आने के कारणों में शामिल हो सकता है।उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ यात्रियों और रेलकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रेल परिचालन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर समझाया, सीपीआर की दी ट्रेनिंग
प्रशिक्षण के दौरान डिजिटल और पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से सैद्धांतिक जानकारी दी गई। इसके बाद आउटडोर मैदान में मॉक ड्रिल आयोजित की गई।डेमोस्ट्रेटर अनिल कुमार सिंह ने हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और कार्डियक अरेस्ट के बीच अंतर समझाया। उन्होंने आपातकालीन स्थिति में सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया।इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के अग्निशामक यंत्रों के सुरक्षित और सही उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
घायलों को प्राथमिक उपचार देने का कराया अभ्यास
डेमोस्ट्रेटर अनामिका मंडल ने घायल व्यक्तियों को प्राथमिक उपचार देने और बैंडेज करने की विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया।उन्होंने बताया कि किसी दुर्घटना या आपातकालीन परिस्थिति में घायल व्यक्ति की स्थिति को समझकर उचित प्राथमिक उपचार देना महत्वपूर्ण होता है।प्रशिक्षण में लोको पायलटों को राहत और बचाव कार्यों के दौरान सतर्कता बरतने की जानकारी भी दी गई।
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वंदे भारत, राजधानी, दुरंतो और मालगाड़ियों के चालक हुए शामिल
इस कार्यक्रम में दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर, खड़गपुर, रांची और आद्रा मंडलों से रिफ्रेशर एवं प्रमोशनल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कुल 286 वरिष्ठ और सहायक लोको पायलट शामिल हुए।इनमें वंदे भारत, राजधानी, दुरंतो, सुपरफास्ट, पैसेंजर और मालगाड़ियों का परिचालन करने वाले रेलकर्मी शामिल थे।कार्यक्रम के अंत में लोको पायलटों ने टाटानगर रेल सिविल डिफेंस टीम के प्रशिक्षण की सराहना की।रेल सिविल डिफेंस के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य रेलकर्मियों को वन्यजीव सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक बनाना तथा आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने के लिए तैयार करना है।


