जमशेदपुर।
जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY 2026) को लेकर उत्साह अभी से चरम पर है। इसी कड़ी में विश्वविद्यालय के बिष्टुपुर परिसर में 100 दिवसीय काउंटडाउन कार्यक्रम के तहत एक अत्यंत भव्य और विस्तृत आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कुलपति प्रोफेसर इला कुमार के कुशल मार्गदर्शन और नेतृत्व में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शांति का एक बड़ा मंच बना। यह कार्यक्रम आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित इंडियन योग एसोसिएशन (IYA), झारखंड राज्य शाखा और उसकी सहयोगी संस्था ग्रामीण उपकार संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। यह आयोजन इस राष्ट्रव्यापी काउंटडाउन श्रृंखला का 69वां दिन था, जिसने छात्राओं और संकाय सदस्यों के बीच योग के प्रति एक नई ऊर्जा और जागरूकता का संचार किया।
प्रातःकालीन सत्र: योगासन और प्राणायाम से हुई दिन की सकारात्मक शुरुआत
कार्यक्रम को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए इसे दो मुख्य चरणों में विभाजित किया गया था। प्रथम चरण की शुरुआत सुबह की ताजी हवा और सकारात्मक ऊर्जा के बीच बिष्टुपुर कैम्पस में प्रातः 7 बजे से 8 बजे तक हुई। इस एक घंटे के सत्र में योगासन, प्राणायाम और ध्यान का वृहद सामूहिक अभ्यास कराया गया। इस सत्र में विश्वविद्यालय की छात्राओं, शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने भारी संख्या में पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ भाग लिया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया, जो ज्ञान और चेतना के प्रकाश का प्रतीक है। इसके पश्चात योग विभाग की प्रतिभावान छात्राओं द्वारा योगासनों की विभिन्न कठिन और लाभदायक मुद्राओं को प्रदर्शित करते हुए एक बेहद सुंदर और मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. किश्वर आरा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए अपना स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।
इस प्रातःकालीन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में पश्चिमी सिंहभूम के विधायक सरयू राय ने शिरकत की। अपने सारगर्भित वक्तव्य में विधायक सरयू राय ने योग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग का मुख्य और मूल कार्य ‘जोड़ना’ है—आत्मा को परमात्मा से, और मनुष्य को समाज से। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज योग का महत्व केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अमिट पहचान बना चुका है। सरयू राय ने सभी उपस्थित लोगों से अपील की कि वे योग को केवल एक दिन का कार्यक्रम न मानें, बल्कि इसे अपनी जीवन शैली का अभिन्न अंग बनाते हुए प्रतिदिन इसका अभ्यास करें।
खरकई ऑडिटोरियम में ज्ञानवर्धक कार्यशाला: ‘कल्याण, ज्ञान और विश्व शांति’ का संदेश
कार्यक्रम का द्वितीय चरण दोपहर 3 बजे विश्वविद्यालय के बिष्टुपुर कैम्पस स्थित खरकई ऑडिटोरियम में शुरू हुआ। यह सत्र योग पर आधारित एक दिवसीय जागरूकता सह कार्यशाला के रूप में आयोजित किया गया था। इस कार्यशाला का मुख्य विषय और थीम ‘योग: कल्याण, ज्ञान और विश्व शांति के लिए’ (Yoga for wellness, wisdom and world peace) रखा गया था। दीप प्रज्ज्वलन से शुरू हुए इस सत्र में डॉ. किश्वर आरा ने एक बार फिर अतिथियों का स्वागत किया। योग एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुबोध कुमारी ने भी इस महत्वपूर्ण आयोजन की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
झारखंड इंडियन योग एसोसिएशन के सचिव अमित कुमार ने थीम की गहरी व्याख्या करते हुए कहा कि योग का प्रभाव हमारे बाहरी व्यक्तित्व और आंतरिक व्यवहार दोनों में स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए। उन्होंने ‘वेलनेस’ (Wellness) का अर्थ आरोग्य बताते हुए समझाया कि जब इंसान को तेज गुस्सा आता है, तो केवल गहरी सांस लेने के अभ्यास से वह हृदय की कई गंभीर बीमारियों से खुद को बचा सकता है। ‘विजडम’ (Wisdom) यानी प्रज्ञा को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि यह हमारे अंदर से स्वतः जागृत होती है। उन्होंने आध्यात्मिक गुरु रविशंकर का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे सकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से मोर भी नाचने लगते हैं। अमित कुमार ने स्पष्ट किया कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की महान सोच पूरी दुनिया को भारत की देन है और योग के निरंतर अभ्यास के कारण ही देश और समाज में सच्ची शांति स्थापित की जा सकती है।
तनाव प्रबंधन, आयुर्वेद और जीवन जीने की कला है योग
कार्यशाला में उपस्थित अन्य विशेषज्ञों ने भी योग के विभिन्न व्यावहारिक और वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञ प्रीति चौधरी ने आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कुछ बहुत ही उपयोगी और प्रायोगिक अभ्यास कराए, जिससे उपस्थित छात्राओं ने तनावमुक्ति का प्रत्यक्ष अनुभव किया। डॉ. कामाख्या कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि हम योग के बारे में जितना भी सैद्धांतिक ज्ञान रखते हैं, उसे अपने दैनिक व्यवहार में उतारना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा कि योग वास्तव में जीवन जीने की एक उत्कृष्ट कला है। “दिमाग जिसे सही दिशा में कंट्रोल कर सके, वही सच्चा योग है,” यह कहते हुए उन्होंने संतुलित जीवन जीने के लिए निरंतर योग अभ्यास पर बल दिया।
आयुर्वेद चिकित्सक मनीष दूदिया ने आयुर्वेद और योग के गहरे अंतर्संबंध पर अपने विचार रखे। उन्होंने अपना चिकित्सा अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब दवाओं के साथ योग के अभ्यास को जोड़कर मरीजों का इलाज किया गया, तो उसके परिणाम बेहद सकारात्मक और आश्चर्यजनक रूप से लाभदायक रहे। आयुष मेडिकल ऑफिसर मुकुल कुमार ने मानव जीवन के 16 संस्कारों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत हमेशा से ज्ञान की पावन भूमि रही है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए हर दिन योग जरूरी है। मुकुल कुमार ने स्पष्ट किया कि केवल आसनों के अभ्यास तक सीमित न रहें, बल्कि यम और नियम का भी पालन करें, क्योंकि इसी से मोक्ष की प्राप्ति संभव है। उन्होंने बच्चों में बचपन से ही योग के संस्कार डालने पर जोर दिया ताकि वे नकारात्मक सोच से पूर्णतः मुक्त हो सकें।
अंजन कुमार ने कार्यस्थल पर एकाग्रता बढ़ाने के लिए ‘योग ब्रेक’ के संदर्भ में महत्वपूर्ण जानकारी दी और छोटे योग प्रयोग भी करवाए। हेल्थ सेक्टर से जुड़ीं वाइ शैलजा ने जेरिएट्रिक (Geriatric) पापुलेशन यानी बढ़ती उम्र के लोगों के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि उम्र के साथ शरीर में कई बदलाव आते हैं, जिन्हें नियमित योग के जरिए प्रबंधित किया जा सकता है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, व्यापक सहभागिता और सफल समापन
इस बौद्धिक कार्यशाला के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी खूब समां बांधा। संगीत विभाग की श्रेया पॉल ने अपने मनमोहक नृत्य से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीत और योग विभाग की छात्राओं ने ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना’ गीत की अत्यंत भावपूर्ण प्रस्तुति दी। वहीं, बी.कॉम की छात्रा पद्मा शर्मा ने मंच पर योग की शानदार और जटिल मुद्राओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
इस भव्य और सफल आयोजन में विश्वविद्यालय के सभी प्रमुख पदाधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही। इनमें छात्र कल्याण अधिष्ठाता एवं कुलसचिव डॉ. सलोमी कुजूर, मानविकी संकायाध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार साहु, खेल एवं संस्कृति विभाग के अध्यक्ष डॉ. सनातन दीप, ग्रामीण उपकार संस्थान के प्रतिनिधि कालीदास तिवारी, पतंजलि योग समिति के अजय कुमार, डीन वाणिज्य डॉ. दीपा शरण, सीवीसी अन्नपूर्णा झा, डॉ. रिजवाना परवीन, डॉ. पुष्पा कुमारी और डॉ. माधुरी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इन सभी गणमान्य लोगों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और लगभग 1000 छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लेकर इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।
मंच का कुशल और सुचारू संचालन डॉ. पुष्पलता एवं रवि नेवार के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। अंत में, ग्रामीण उपकार संस्थान के कालीदास तिवारी और मानविकी संकाय अध्यक्ष एवं प्रॉक्टर डॉ. सुधीर कुमार साहु द्वारा सभी अतिथियों, आयोजकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ अत्यंत उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा के बीच इस भव्य योग काउंटडाउन कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।





