
जमशेदपुर: औद्योगिक विकास को गति देने और उद्योगों के सामने आ रही बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से शनिवार, 8 अगस्त 2026 को ‘जियाडा’ (JIADA) रेगुलेशंस 2026 के मसौदे पर एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में JIADA के प्रबंध निदेशक (MD) श्री वरुण रंजन (IAS) ने अपनी टीम के साथ उद्योग एवं व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों की हर बात को धैर्यपूर्वक सुना और प्रस्तावित नियमों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान क्षेत्रीय निदेशक श्री प्रेम रंजन और डिप्टी डायरेक्टर श्री दिनेश रंजन भी मौजूद रहे। SCCI, ASIA, लघु उद्योग भारती (Laghu Udyog Bharati) और FJCCI जैसे संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगें रखते हुए नए नियमों को सरल और पारदर्शी बनाने की अपील की।


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पहली बार मिलेंगी जॉइंट वेंचर, सब-लीज और सिक यूनिट रिवाइवल की सुविधा
उद्योग संगठनों को यह जानकर विशेष रूप से खुशी हुई कि JIADA के इतिहास में पहली बार रेगुलेशंस में ‘Joint Venture’, ‘Sub-Lease’ और बीमार इकाइयों के पुनरुद्धार के लिए ‘Sick Units Revival’ जैसी योजनाएं शामिल की जा रही हैं।
जॉइंट वेंचर (Joint Venture): 26% तक इक्विटी पर केवल प्रोसेसिंग फीस लगेगी, जबकि 50% से अधिक पर ट्रांसफर फीस लागू होगी। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और एक्सपोर्ट ओरिएंटेड इकाइयों को भारी रियायतें मिलेंगी।
सब-लीज (Sub Lease): निर्मित क्षेत्र के 10% तक बिना किसी शुल्क के सिर्फ सूचना देना काफी होगा।
सिक यूनिट्स (Sick Units): बंद या बीमार पड़ी इकाइयों को चालू करने के लिए Penal Rent की पूरी माफी और मूल बकाया के 80% पर ‘वन टाइम सेटलमेंट’ (One-Time Settlement) का सुनहरा अवसर दिया जाएगा।
प्लॉट का हुआ वर्गीकरण, मिलेगा ‘Deemed IOP’
नए मसौदे के अनुसार, हाईवे के किनारे वाले भूखंडों को ‘प्राइम प्लॉट’ (Prime Plot) मानकर A+, A, B+ और B ग्रेड में बांटा जाएगा। आरक्षण नीति के तहत 40% प्लॉट MSME के लिए, 10% SC/ST और 10% महिला उद्यमियों के लिए आरक्षित रहेंगे। 2016 के नियमों के तहत आवंटित वह इकाइयां जो उत्पादन तो कर रही हैं लेकिन जिनका IOP दर्ज नहीं है, वे 6 महीने के भीतर ‘Deemed IOP’ के लिए आवेदन कर सकेंगी। यह बिजली खपत और GST रिटर्न के आधार पर जारी होगा।
‘नियम हों ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के अनुरूप’
SCCI के अध्यक्ष मानव केडिया सहित अन्य उद्योग प्रतिनिधियों ने एकमत से कहा कि JIADA Regulations 2026 पूरी तरह से पारदर्शी और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) के अनुरूप होने चाहिए। बैठक के अंत में MD श्री वरुण रंजन ने सभी सुझावों को गंभीरता से लेते हुए आश्वस्त किया कि अंतिम रेगुलेशंस तैयार करते समय उद्योगों के विकास को सुगम बनाने वाले सभी व्यावहारिक सुझावों को शामिल किया जाएगा।


