जमशेदपुर: राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे ‘मेरी दोस्ती तुमसे’ (MDT) अभियान के 20वें दिन बुधवार, 4 नवंबर 2026 को सुंदरनगर स्थित पीएम श्री कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में कुष्ठ रोग जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं को कुष्ठ रोग के लक्षण, पहचान, जांच और उपचार की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में जिला कुष्ठ परामर्शी डॉ. राजीव लोचन महतो ने बताया कि कुष्ठ रोग बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है और नियमित रूप से मल्टी ड्रग थेरेपी (MDT) की दवा लेने से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बीमारी की समय पर पहचान और उपचार शुरू होने से दिव्यांगता से बचाव संभव है।
1 अप्रैल 2025 से लागू हुआ संशोधित उपचार प्रोटोकॉल
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान डॉ. राजीव लोचन महतो ने कुष्ठ रोग के प्रमुख लक्षणों, प्रकार, निदान और उपचार की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2025 से देशभर में कुष्ठ रोग के लिए संशोधित उपचार दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं। छात्राओं को नए उपचार प्रोटोकॉल और MDT दवाओं के महत्व से अवगत कराया गया।
उन्होंने बच्चों से अपील की कि कुष्ठ रोग के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने में सहयोग करें और बीमारी से पीड़ित लोगों के साथ सामान्य व्यक्ति की तरह सम्मानजनक व्यवहार करें।
कुष्ठ मरीजों को मिलती है 500 रुपये मासिक सहायता
डॉ. राजीव ने बताया कि कुष्ठ रोगियों को उनके चिकित्सकीय उपचार की अवधि के दौरान सरकार की ओर से प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद कुष्ठ मरीजों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि वे भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
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सेल्फ केयर और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की दी जानकारी
कार्यक्रम में नवजागृत मानव समाज (NJMS) के पार्थो भट्टाचार्य ने दिव्यांगता निवारण एवं चिकित्सा पुनर्वास (DPMR) के तहत सेल्फ केयर और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने समझाया कि उचित देखभाल और समय पर उपचार से कुष्ठ रोग से जुड़ी शारीरिक समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
डॉ. राजीव लोचन महतो ने अपने संबोधन में कहा कि कुष्ठ रोग के उन्मूलन के लिए समाज के सभी लोगों को मिलकर प्रयास करना होगा। मरीजों के प्रति भेदभाव और गलत धारणाओं को समाप्त कर उन्हें सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में शामिल करना जरूरी है।
कार्यक्रम के अंत में छात्राओं के बीच कॉपी, पेन, बिस्कुट और चॉकलेट का वितरण किया गया। आयोजन को सफल बनाने में नवजागृत मानव समाज, विद्यालय की वार्डन, शिक्षिकाओं और छात्राओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।


