
जमशेदपुर.
United Forum of Bank Unions (UFBU) के देशव्यापी हड़ताल के आह्वान पर आज लौह नगरी जमशेदपुर में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के आंदोलन का व्यापक असर देखा गया. वर्ष 2024 में हुए एमओयू (MOU) के बावजूद पिछले दो वर्षों से लंबित ‘पांच दिवसीय बैंकिंग कार्य दिवस’ (5-Day Banking) और ‘परफॉरमेंस लिंक्ड इंसेंटिव’ (PLI) में असमानता को लेकर बैंककर्मियों ने केंद्र सरकार और वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) के अड़ियल रवैये के खिलाफ कड़ा आक्रोश व्यक्त किया.
डिजिटल दौर में वर्क-लाइफ बैलेंस की अनदेखी पर रोष
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि आज देश में 98 प्रतिशत बैंकिंग कार्य डिजिटल हो चुका है. RBI, LIC, GIC, SEBI, NABARD, SIDBI, DFS और केंद्र सरकार के अधिकांश कार्यालयों के साथ-साथ BRICS देशों में भी 5-Day Banking व्यवस्था लागू है. पूरी दुनिया में वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए चार दिवसीय कार्य दिवस पर मंथन चल रहा है, लेकिन बैंक कर्मचारियों को जायज मांग के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है.
हड़ताल का व्यापक प्रभाव:
शाखाएं प्रभावित: राष्ट्रीयकृत एवं ग्रामीण बैंकों की लगभग 400 शाखाओं में कामकाज पूरी तरह बाधित रहा.
एटीएम सेवा ठप: शहर भर के करीब 350 एटीएम पर ताले लटके रहे या कैश किल्लत की स्थिति बनी रही.
वित्तीय नुकसान: हड़ताल के चलते अकेले जमशेदपुर में अनुमानित 800 करोड़ रुपये का बैंकिंग लेन-देन बुरी तरह प्रभावित हुआ.
ग्राहकों से सहयोग की अपील
यूनियन प्रतिनिधियों ने आम जनता और ग्राहकों को हुई असुविधा के लिए गहरा खेद प्रकट किया है. उन्होंने अपील की कि बैंक कर्मचारी अपनी न्यायसंगत मांगों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, इसलिए जनता से नैतिक सहयोग की अपेक्षा है.
वरिष्ठ पेंशनर्स और युवा साथियों की एकजुटता
आंदोलन को मजबूत करने में स्टेट बैंक पेंशनर्स एसोसिएशन जमशेदपुर के वरिष्ठ सदस्यों का अहम योगदान रहा. कामरेड चमक सेनगुप्ता, टी एस कलसी, टी शशि कुमार, सुभरल राय, सरोज राय, अरूप सेन एवं भसानी ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई.
अधिकारियों व कर्मचारियों का विशाल जमावड़ा
हड़ताल को सफल बनाने में AIBOC और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों व सदस्यों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.
AIBOC प्रतिनिधि साथी मनोज कुमार, अशोक कुमार, रविनंदन प्रसाद, सत्य प्रकाश, अनिल कुमार, सुदिप्ता मजुमदार, दीपा कुमारी, दिव्यलेखा, अन्नु खलको, विकास कुमार, सुधांशु पाण्डेय।
कर्मचारी संगठन के प्रमुख चेहरे: कामरेड सपन अदक, रामजी प्रसाद, आर बी सहाय, सत्येंद्र कुमार सिंह, तपन मिश्रा, अरिंदम बरूआ, विकास कुमार, कृष्णा सिंह, मकबूल आलम, हरेंद्र, नीशांत, नूतन, नीति, नेहा, किरण, पूजा, पूनम, मृतुन्जय, सुमन, समरीन, कविता, बबिता, श्वेता, हेमा, मनदीप, उर्मिला, जास्मिन, नीलम, नीकिता, विजया, नंदिनी, निभा, सपना, रूपा, दिव्या, प्रिती, करोबी, सुचेता, संयुकता, सोनी, अर्पिता, शिल्पी, दीप्ति, शकुंतला, रविशंकर, विवेक परासर सिन्हा, धीरज कुमार, रीतु कुमारी, जनार्दन कुम्हार, माया चौधरी, एस हर्षा, शंकर मछुवा, इंद्र सिंह, प्रियंका अग्रवाल, श्वाति कुमारी, हीरामति, निवेदिता, मंजु, ललिता, गौरी, निधि, अर्चना, मीनी, रूही, कल्पना, अनीमा, सपन, रेशमी, सरोज, मेरी, ज्योति, सुषमा, कुसुम, गीता, अंजली, रीमा और अंशुमा पेलोंग सहित सैकड़ों साथियों ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित की. यूनियन ने प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का धन्यवाद व्यक्त किया, जिन्होंने बैंककर्मियों की वाजिब मांगों को प्रमुखता से सरकार और जनता के समक्ष रखा.


