टारगेट पूरा करने के लिए की गई ताबड़तोड़ नसबंदी, आठ महिलाओं की मौत, 32 की हालत खराब

 बिलासपुर (छत्‍तीसगढ़). नसबंदी का टारगेट पूरा करने के लिए छत्‍तीसगढ़ में लगाए गए एक शिविर में कुछ घंटों में 83 महिलाओं की नसबंदी करने के मामले में मरने वाली महिलाओं की तादाद 10 हो गई है। 32 की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। सरकार ने इस मामले में चार डॉक्‍टरों को सस्‍पेंड कर दिया है। वहीं, कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री को बर्खास्त किए जाने और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की भी मांग की है। वही इस मामले में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने बिलासपुर की दुर्भाग्‍यपूर्ण त्रासदी पर छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री डॉ. रमन सिंह से बातचीत की। 

क्या है मामला

शनिवार को बिलासपुर से करीब 10 किमी दूर कानन पेंडारी के नेमीचंद अस्पताल में शिविर लगा था। राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम में नसबंदी करवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को टारगेट मिला हुआ है। इसी टारगेट को पूरा करने के लिए शिविर लगाया गया था। जिला अस्पताल के डॉ. आरके गुप्ता, डॉ. केके ध्रुव और डॉ. निखटा ने दूरबीन पद्धति से ऑपरेशन के चंद घंटे बाद सभी महिलाओं को छुट्‌टी दे दी। महिलाएं अपने-अपने घरों तक पहुंची तो एक-एक कर सभी की तबीयत बिगड़ने लगी। रविवार को उन्हें उल्टियां आने लगीं। हालत बिगड़ती देख उन्होंने स्थानीय स्तर पर डॉक्टरों से संपर्क किया। सोमवार को स्थिति और बिगड़ गई। सुबह से जिला अस्पताल और सिम्स में महिलाओं के आने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह देर रात तक जारी रहा। एक महिला की मौत तो उस समय हुई, जब कलेक्टर वार्ड में ही पीड़ितों का हालचाल जान रहे थे।

 

रमन ने दिए जांच के निर्देश
मरने वाली महिलाओं के परिवार को 2-2 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की गई है। गंभीर रूप से बीमार महिलाओं को 50 हजार रुपए मुआवजा दिए जाने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमिटी बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के निदेशक को तत्काल बिलासपुर के लिए रवाना भी किया है। सोमवार देर रात स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल सिम्स में पीड़ितों को देखने पहुंचे तो वहां हंगामा खड़ा हो गया। परिजनों ने अग्रवाल से लापरवाही पर जवाब मांगा और उनका घेराव भी किया। इस बीच पुलिस वहां आई और मामले को शांत कराया।

 

सरकारी शिविरों में लगातार हो रही लापरवाही 

प्रदेश में लगने वाले सरकारी शिविरों में इस तरह की लापरवाही लगातार हो रही है। डॉक्टरों के गैरजिम्मेदाराना कृत्यों की वजह से पहले भी लोगों को नुकसान होता रहा है। वर्ष 2011 में बालोद के शिविर में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 48 लोगों की आंखें खराब हो गई थीं। 2012 में दुर्ग में 12 और कवर्धा में 4 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी। वहीं, 2013 में बागबाहरा में छह लोगों की आंखें खराब हो गईं।

प्रधानमंत्री ने बिलासपुर की दुर्भाग्‍यपूर्ण त्रासदी पर छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री से बातचीत की 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने बिलासपुर की दुर्भाग्‍यपूर्ण त्रासदी पर छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री डॉ. रमन सिंह से बातचीत की।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक ट्वीट में कहा है, ‘प्रधानमंत्री ने बिलासपुर में हुई दु:खद घटना पर छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री डॉ. रमन सिंह से बातचीत की। प्रधानमंत्री ने इस त्रासदी पर चिंता जताई। प्रधानमंत्री ने डॉ. रमन सिंह से पूरे मामले की व्‍यापक जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।’

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