टीएमएच ने आत्महत्या निवारण हेतु जागरुकता पैदा करने के लिए सेमिनार का आयोजन

 

् वैश्विक स्तर पर 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या निवारण दिवस के रूप में मनाया जाता है्

संवाददाता.जमशेदपुर, 10 सितम्बर, 2014:

टाटा मेन हॉस्पीटल (टीएमएच) के मनोरोग विभाग ने आत्महत्या रोकने और जागरुकता के प्रसार हेतु अपने प्रयास में आज टीएमएच ऑडिटोरियम में छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों तथा स्कूल प्राचार्यों के लिए एक सेमिनार का आयोजन किया जिसका शीर्षक था- परीक्षा के तनाव और विफलता से कैसे निपटा जाये। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या निवारण दिवस के रूप में मनाया जाता है।श्रीमती रुचि नरेन्द्रन इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि तथा श्रीमती श्रीमंति सेन विशिष्ट अतिथि थीं। इस अवसर पर आत्महत्या की रोकथाम के प्रति जागरुकता पैदा करने के उद्देश्य से एडीएल सनसाइन स्कूल के छात्रों ने एक स्किट का प्रदर्शन किया।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्रीमती रुचि नरेन्द्रन ने कहा कि आत्महत्या निवारण आज एक बहुत गंभीर चिंता का विषय बन गया है, खास कर युवाओं क े बीच। यह अवस्था जीवन के सबसे संवेदनशील चरणों में से एक है जिससे हम सभी को गुजरना पड़ता है। अपेक्षाओं एवं खुशियों के अलावा, लगातार बदलते सामाजिक आर्थिक परिदृश्य के कारण यह अपने साथ थोड़ा बहुत तनाव लेकर आता है। मैं सभी युवाओं से अनुरोध करती हूं कि वे स्कूलों में मौजूद विभिन्न क्लबों का बेहतर तरीके से उपयोग करें, जो खास कर इन्हींमुद्दों के समाधान के लिए स्थापित किया गया है। टाटा मेन हॉस्पीटल में, हमारे पास सुसज्जित मनोरोग विभाग है जो शहर के सबसे बेहतरीन जगहों में से एक है जहां कोई भी तनावग्रस्त व्यक्ति पहुंचकर मदद पा सकता है। जीवन अनमोल है और इसका संरक्षण करना चाहिए, ना कि किसी ऐसे कारण के लिए स्वयं को नुकसान पहुँचाना चाहिए जिसका हल अन्य तरीके से किया जा सकता है। हर साल, 800,00 से अधिक लोगों की मृत्यु का कारण आत्महत्या है, मोटे तौर पर कहे तो प्रत्येक 40 सेकेंड में एक मौत होती है। आप यह जानकर हैरान होंगे कि आत्महत्या के कारण होने वाली मौतों की संख्या, हत्या और युद्ध दोनों को मिलाकर उनसे होनेवाली मौतों से अधिक है। 2012 में वैश्विक स्तर पर 15-29 वर्ष आयुवर्ग में होनेवाली मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण आत्महत्या है। क ुल मिलाकर, ऐसा अन ुमान है कि प्रत्येक व्यक्ति जिनकी मृत्यु आत्महत्या के कारण हुई है वहीं 20 से ज्यादा ऐसे अन्य लोग हैं जिन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया है।प्रतिदिन हमारे ऊपर हर दिशा से तनाव की बौछार होती है। हालांकि, अत्यधिक और लंबे समय तक तनाव हानिकारक हो सकता है। विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि आत्महत्या के गंभीर प्रयास विद्यार्थियों में ज्यादा देखे गये हैं जिन्होंने उच्च उपलब्धियां हासिल की हैंै और वे अपने प्रदर्शन के स्तर को बरकरार रखने के लिए अधिक दबाव महसूस करते हैं। किशोरों में आत्महत्या के प्रयास को रोकने के क्रम में चेतावनी के संकेतों के बारे में जानना महत्वपूर्ण है। अपने किशोरों और उनके दोस्तों के साथ खुले संवाद कायम करने से हमें जरूरत के मुताबिक मदद करने काअवसर मिलता है। अपने आप को नुकसान पहुंचाने का सबसे आम कारण खराब परीक्षाफल, अभिभावकों या साथियों के साथ रिश्ते में खटास, ब्रेकअप, परीक्षा में फेल होना और मादक पदार्थों के सेवन से संबंधित है।

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