जमशेदपुर। दिल के दौरा पड़ने के बाद छाती का टूटना बहुत दुर्लभ हैं। ऐसे मामलों में तत्काल सर्जरी की आवश्यकता होती है पर अधिकांशतः मरीज समय पर हाॅस्पिटल नहीं पहुँच पाते हैं जिसके कारण बहुत ज्यादा रक्त स्त्राव से मरीज के जीवन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में आवश्यक सर्जरी से होने वाले मृत्यू का दर लगभग 70 से 80 प्रतिशत होता है। लेकिन ब्रह्मानन्द नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हाॅस्पिटल के हृदय रोग विशेषज्ञों की अनुभवी एवं समर्पित टीम में उपस्थित डाॅ. परवेज आलम, सीनीयर कार्डियक सर्जन, डाॅ. अजय अग्रवाल, इंटरवेंशनल कार्डियोलाॅजिस्ट, डाॅ. राहुल देवदास एवं डाॅ. रामानुज लाल (कार्डियक ऐनेस्थेसियोलाॅजिस्ट) ने इस चुनौती को स्वीकार कर इस जटिल समस्या से पीड़ित मो. यूसुफ की जान को बचाया। आॅपरेशन के 6 दिन के बाद मो. यूसुफ को हाॅस्पिटल से छुट्टी दे दी गई। बीएनएमएच के सीनीयर कार्डियक सर्जन डा. परवेज आलम ने बताया कि एक दुर्लभ एवं प्राण घातक स्थिति के कारण मो. यूसुफ की पूरी प्रक्रिया कई स्तरों पर जटिल थी। इस सफल सर्जरी में सहयोग के लिए अपनी टीम का शुक्रगुजार हूँ। उन्होंने कहा कि मरीज को जान के खतरे से बचने के लिए, एनेस्थेसिया के बाद जल्द से जल्द छाती को खोलना जरुरी था। ऐसे मरीजों को ठीक करने के लिए रक्त स्त्राव को नियंत्रित करने के लिए सर्जिकल तकनिक बहुत महत्वपूर्ण है। हृदय की अधिकांशतः सर्जरी, हार्ट लंग्स मशीन पर की जा रही है जहाँ रोगी का सारा खून मशीन में चला जाता है यह मशीन रोगी के हृदय और फेफड़े का काम करता है इसलिए हृदय ही सर्जरी आसानी से हो पाती है। परन्तु ऐसे मरीज हार्ट लंग्स मशीन को स्थापित करने के लिए ज्यादा समय नहीं देते हैं। इस मरीज के सभी क्लीनिकल मापदण्डों को बनाये रखते हुए, बिना हार्ट लंग्स मशीन की सहायता से हृदय की सर्जरी की गई। सर्जरी को सफल बनाने में समर्पित एवं अनुभवी डाक्टरों की टीम एवं निपुण नर्सिंग कर्मचारियों ने अपना योगदान दिया।



