प्रधानमंत्री के सभा में मुख्यमंत्री हेमत सोरेन का कोई अपमान नही हुआःसरयू राय

संवाददाता,जमशेदपुर, २२ अगस्त

झारखंड में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम मे राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हुटींग करने का मामला तुल पकङने लगा है इस मामले को लकेर जहाँ राज्य में अलग अलग स्थानो मे प्रधानमंत्री का पुतला फुंका जा रहा और इस घटना की निदा की जा रही है इस मामले को लेकर भाजपा के वरीय नेता सरयू राय ने कहा है कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम में दौरान झारखंड की जनता के प्रगाढ़ सम्मान और अटूट स्नेह को मुंख्य मंत्री हेमंत सोरेन द्वारा अपना अपमान समझना और उसे अपनी हुटिंग बताना उनकी भूल है और इसकी प्रतिक्रिया में राज्य के विभिन्न स्थानो पर प्रधान मंत्री का पुतला जलाया जाना एक घटिया हरकत है तथा झारखंड सरकार चलाने वालों की हीन भावना और मन में चोर होने का द्योतक है । मुख्य मंत्री को इसके लिये देश से सार्वजनिक क्षमा याचना करनी चाहिये ।

उन्होने कहा कि मुख्य मंत्री को बताना चाहिये कि प्रधान मंत्री की सभा में उनके प्रति कौन सा अपमान जनक शब्द का प्रयोग भीड़ ने किया । न तो किसी ने मुख्य मंत्री को भ्रष्ट कहा जबकि सरकार के भ्रष्टाचार की ख़बरें रोज़ अख़बारों में छप रही है,न तो किसी ने मुख्य मंत्री को संविधान विरोधी कहा जबकि नियम,क़ानून, संविंधान के विरुद्ध सरकार के कारनामे रोज़ अख़बारों में छप रहे हैं , मुख्य मंत्री चोर है, बेइमान है, भ्रष्ट है, मुख्य मंत्री वापस जाओ आदि नारे भी किसी ने नहीं लगाया । फिर मुख्यमंत्री का अपमान कैसे हुआ यह उन्हे बताना चाहिये ।

सरयु राय ने कहा कि हुआ इतना ही कि जब मुख्य मंत्री बोलने खड़ा हुये तो भीड़ ने मोदी-मोदी-मोदी का उच्चारण किया और बीच बीच में ऐसा करते रहे । ऐसा तो केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और पीयुष गोयल के भाषण के दौरान भी हुआ । स्वयं प्रधान मंत्री बोलने उठे तो काफी देर तक मोदी-मोदी-मोदी के नारे लगते रहे । विगत दिनों जब उसी मैदान में वे चुनावी सभा संबोधित कर रहे थे तब भी ऐसे ही नारे भीड़ से लग रहे थे । ये नारे प्रधान मंत्री के प्रति जनसमूह के प्रम के प्रतीक हैं । यदि मुख्यमंत्री चाहते है कि ऐसा ही प्रेम उनके प्रति भी जनसमूह प्रदर्शित करता तो उन्हे आत्म निरीक्षण करने की ज़रुरत है ।

इस सभा में अपने भाषण में मुख्य मंत्री ने परम्परा के विपरीत प्रधान मंत्री पर कटाक्ष किया । समय नही देने की बात कहीं, आलू-प्याज़ का विषय उठाया, खान नीति और खनन क्षेत्रों में लाल पानी की बात कहीं जबकि ये मामले राज्य की कार्य संस्कृति से जुड़े है । मधु कोड़ा और हेमंत सोरेन सरकार में लौह अयस्क नीति का पालन नहीं होनहार है, लूट मची है , सुप्रीम कोर्ट का निर्णय लागू नहीं हो रहा है, लीज़ नवीकरण हो रहा है तो इसके लिये प्रधानमंत्री नहीं बल्कि मुख्य मंत्री दोषी हैं । ऐसा कहकर हेमंत जी ने प्रधान मंत्री को नीचा दिखाने और घर आये मेहमान पर लांछन लगाने की कोशिश मुख्य मंत्री ने किया है जो संघीय ढाँचा के तहत अपमान जनक और अशालीन व्यववहार का द्योतक है । मुख्य मंत्री को इसके लिये सार्वजनिक रुप से खेद व्यक्त करना चाहिये ।

 

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