जमशेदपुर के पूर्व जिला शिक्षा शिक्षा अधीक्षक रहें बांके बिहारी सिंह की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है। रिटायरमेंट के अंतिम वर्ष में प्रवेश करते ही बांके बिहारी सिंह की पूर्व की कारस्तानियों से उनकी परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही। धनबाद के चर्चित चापाकल घोटाले में निलंबित चल रहे पूर्व डीएसई इसबार दलित उत्पीड़न मामले में फँसे हैं। धनबाद में योगदान के दौरान दलित उत्पीड़न मामले में पूर्व डीएसई बांके बिहारी सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को धनबाद कोर्ट के डिस्ट्रिक्ट एंड एडिशनल जज-6 ने खारिज कर दिया है। दलित उत्पीड़न का यह मामला वर्ष 2016 का है जब श्री सिंह बतौर डीएसई धनबाद में योगदान कर रहे थें। राम सागर प्राइमरी स्कूल (मनईटांड़, धनबाद) के सेवानिवृत्त शिक्षक सरयू राम ने डीएसई बांके बिहारी सिंह सहित एक और शिक्षक पर जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित करने और चैंबर से बाहर निकाल देने के मामले में सीपी केस दर्ज़ कराया था। केस खुलने के बाद डीएसई ने धनबाद कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। न्यायालय ने जिला शिक्षा अधीक्षक बांके बिहारी सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दिया।
धनबाद के चर्चित चापाकल घोटाले में निलंबित हैं बांके बिहारी
जमशेदपुर के पूर्व जिला शिक्षा अधीक्षक रहें बांके बिहारी सिंह का घोटालों और फर्जीवाड़े से गहरा ताल्लुक है। धनबाद के चर्चित चापाकल घोटाले में बीते नौ मई को झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया है। बांके बिहारी सिंह राज्य शिक्षा सेवा के वर्ग 2 के अधिकारी हैं और फ़िलहाल निलंबित होने के कारण माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में योगदान कर रहे हैं। उनपर विभिन्न जिलों में प्रतिनियुक्ति के दौरान कई गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। धनबाद में उनपर चापाकल घोटाला के साथ ही शिक्षक नियुक्ति में फर्जीवाड़ा करने का आरोप सत्यापित हो चुकी है। वहीं जमशेदपुर में डीएसई रहते बेंच डेस्क आपुर्ति में अनियमितता और कमीशनखोरी का आरोप है। इसके अलावे जमशेदपुर में ही निज़ी स्कूलों के खिलाफ शिकायतों को अनसुना कर फाइलें लटकाने के मामले में स्वेच्छाचारिता और कर्तव्यहीनता के मामले में भी जाँच आदेश निर्गत है। हाल ही में लातेहार में बगैर योगदान किये बाईस महीने की वेतन निकासी कर लेने की शिकायत करते हुए भाजपा नेता अंकित आनंद ने शिक्षा मंत्री और प्रधान सचिव से जाँच की माँग की है।



