राज्य सूचना आयोग ने एसएसपी को लिखा कड़ा पत्र स्वंय उपस्थित होकर एसएसपी दे स्पष्टीकरण – राज्य सूचना आयोग

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पत्रकार को झुठा मामला बनाकर जेल भेजने का

संवाददाता,जमशेदपुर(27अगस्त)

जादुगोङा के दो पत्रकार भाईयो का झुठा मामले बनाकर जेल भेजने के मामले को झारखंड राज्य सूचना आयोग ने काफी गंभीरता से लिया है इस मामले में आयोग को पत्र लिखकर  स्वंय जमशेदपुर के एसएसपी अमोल होमकर को उपस्थित हो कर स्पष्टीकरण देने को कहा है।इस मामले में जादुगोङा की सीमा अग्रवाल ने 19-07-2013 को सूचना अधिकार के तहत आवेदन दिया था सूचना नहीं मिलने पर 21-08-2014 को बाध्य होकर एसएसपी से सूचना की अपील की थी और वहाँ से भी सूचना नहीं मिलने पर राज्य सूचना आयोग से शिकायत की गयी थी एसएसपी द्वारा सूचना नहीं देने पर राज्य सूचना आयोग ने समय सीमा मे जवाब नहीं देने पर गंभीर होते हुए एसएसपी को लिखा है की क्यों न आपके विरुद्ध सूचना कानून की धारा 20(1) तथा 20(2) के तहत आवश्यक आदेश पारित किया जाए , साथ ही पत्र मे यह भी लिखा गया है की एसएसपी को निर्देश दिया जाता है की मांगी गयी सूचना अपीलकर्ता को 1-09-2014 से पहले अपीलकर्ता को भेजकर उसकी प्रतिलिपि राज्य सूचना आयोग के समक्ष 1-09-2014 को सुबह 11.30 बजे स्वंय उपस्थित होकर अपना लिखित स्पष्टीकरण दे अन्यथा आगाह किया जाता है की आयोग आपके विरुद्ध एक पक्षीय आदेश पारित करने पर बाध्य होगा ।

गौरतलब है कि जादूगोड़ा थाना में दो पत्रकारो भाई संतोष अग्रवाल एवं सुशील अग्रवाल पर जादूगोड़ा के बिरेन्द्र सिंह ने 28/13 केस 12/04/2013 को दर्ज़ करवाया है , , एफ़आईआर मे लिखा हुआ है की दोनों भाइयों ने 11-04-2013 को शाम 5 बजे बिरेन्द्र सिंह को मारपीट किया जबकि 11-04-2013 को दोपहर तीन से शाम 7 बजे तक संतोष अग्रवाल धालभूमगढ़ अपने मित्र  मनोज सिंह के साथ मौजुद था , इसी को लेकर सीमा अग्रवाल ने मामले मे डीएसपी के सुपरविजन रिपोर्ट और संतोष अग्रवाल और मनोज सिंह के मोबाइल फोन के डिटेलस और टावर लोकेशन की मांग सूचना अधिकार के तहत की थी जिसे नहीं आज  तक नही दिया गया है ।

इस मामले में पिङीत पत्रकार संतोष अग्रवाल ने बताया की जादूगोड़ा थाना कांड संख्या 28/13 मे पूरा अनुसंधान फर्जी किया गया है केस के आई ओ सुशील डांगा ने दुर्भावना से ग्रसित होकर फर्जी अनुसंधान कर केस डायरी बनाया डीएसपी ने बिना सत्यता को जाने और जांच किए केवल सुशील डांगा की बात पर विश्वास किया और तत्कालीन ग्रामीण एसपी देवेंद्र ठाकुर ने भी दुर्भावना पूर्ण कार्य करते हुए बिना जांच किए मामले मे दोनों भाइयों को फंसा दिया संतोष अग्रवाल ने आगे कहा की मामले मे शामिल सभी पुलिस अधिकारियों और गवाहो का नार्को टेस्ट होना चाहिए और इस मामले की जांच सीआईडी सीबीआई या उच्च स्तरीय होनी चाहिए जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा संतोष अग्रवाल ने कहा की अगर उन्हे न्याय नहीं मिलेगा तो वे उच्च न्यायालय मे उच्चस्तरीय जांच के लिए रिट फाइल करेंगे संतोष ने आगे कहा की जादूगोड़ा मे झूठा केस करवाने का एक समूह बना हुआ है और इसपर उच्चस्तरीय जांच कर कड़ी कारवाई की जानी चाहिए ताकि कोई किसी निर्दोष को फंसा न सके ।

 

 

 

 

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