
रेल खबर।
भारतीय रेलवे में यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करना हमेशा से सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। इसी दिशा में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के नागपुर मंडल के अंतर्गत रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। ट्रेन पर पत्थर फेंकने की एक खतरनाक घटना को सुलझाते हुए आरपीएफ ने त्वरित कार्रवाई कर दो अपचारी (नाबालिग) बालकों को पकड़ा है। यह घटना न केवल रेलवे सुरक्षा के लिए एक चुनौती थी, बल्कि इसके पीछे का कारण जानकर हर कोई हैरान है।
ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस पर कैसे हुई पत्थरबाजी?
घटना 3 मई 2026 की है। गाड़ी संख्या 12101 ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस अपने निर्धारित मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रही थी। तभी रसमड़ा और दुर्ग रेलखंड के मध्य (किलोमीटर 869/10-12 के पास) ट्रेन के सामान्य कोच को निशाना बनाकर अचानक पत्थरबाजी की गई। तेज गति से चल रही ट्रेन पर पत्थर लगने से कोच का कांच क्षतिग्रस्त हो गया। ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों में कुछ पल के लिए दहशत का माहौल बन गया। गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी भी यात्री को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह एक बड़ी चूक साबित हो सकती थी। घटना की सूचना तुरंत रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को दी गई।
आरपीएफ की त्वरित और सघन कार्रवाई
सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। मंडल सुरक्षा आयुक्त (रेसुब/दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, नागपुर) दीप चंद्र आर्य के स्पष्ट मार्गदर्शन और आरपीएफ पोस्ट राजनांदगांव के निरीक्षक प्रभारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने बिना कोई समय गंवाए घटनास्थल का रुख किया और वहां सघन जांच अभियान शुरू कर दिया।
आसपास के इलाकों में पूछताछ और गहन पतासाजी के दौरान आरपीएफ की टीम बघेरा गेट के समीप पहुंची। वहां रेलवे ट्रैक के आसपास दो नाबालिग बालक बेहद संदिग्ध अवस्था में घूमते हुए पाए गए। संदेह के आधार पर जब टीम ने उन्हें हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की, तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ गई।
निशानेबाजी साबित करने की अजीबोगरीब शर्त
पूछताछ के दौरान बालकों ने जो खुलासा किया, वह बेहद चौंकाने वाला था। एक बालक ने कुबूल किया कि वह अपने मित्र के साथ पास ही के एक तालाब में नहाने गया था। नहाने के बाद दोनों दोस्तों के बीच अपनी-अपनी ‘निशानेबाजी’ (Marksmanship) साबित करने को लेकर एक शर्त लग गई।
इसी नासमझी और आपसी शर्त को जीतने के चक्कर में, जब ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस वहां से गुजरी, तो उन्होंने चलती ट्रेन को ही अपना निशाना बना लिया और उस पर जोर से पत्थर दे मारा। पत्थर सीधे ट्रेन के कोच के कांच से जा टकराया। बाद में, जब आरपीएफ ने उनके अभिभावकों को बुलाया, तो बालकों ने अपने परिजनों के सामने भी इस खतरनाक कृत्य को स्वीकार कर लिया।
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रेल अधिनियम के तहत सख्त वैधानिक कार्रवाई
इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए, आरपीएफ पोस्ट राजनांदगांव में दोनों अपचारी बालकों के खिलाफ रेल अधिनियम (Railway Act) की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
रेलवे प्रशासन ने इस घटना के संदर्भ में एक बार फिर स्पष्ट चेतावनी जारी की है। आरपीएफ का कहना है कि चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी जैसी घटनाएं केवल एक ‘शरारत’ नहीं हैं, बल्कि यह कानूनन एक बहुत बड़ा अपराध है। ऐसे कृत्य निर्दोष यात्रियों की जान को गंभीर खतरे में डाल सकते हैं और इससे बड़ी रेल दुर्घटना भी हो सकती है। ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अत्यंत कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
रेलवे की आम नागरिकों से अपील और हेल्पलाइन नंबर
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, नागपुर मंडल के रेलवे सुरक्षा बल ने स्थानीय आम नागरिकों, अभिभावकों और रेल यात्रियों से एक विशेष अपील की है। रेलवे ट्रैक या उसके आसपास यदि कोई भी संदिग्ध गतिविधि, कोई अज्ञात वस्तु या असामाजिक तत्व नजर आते हैं, तो उसकी सूचना तुरंत अपनी नजदीकी आरपीएफ पोस्ट को दें।
इसके अलावा, आपात स्थिति में तुरंत रेलवे के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 139 पर कॉल करके भी सूचना दी जा सकती है। रेलवे सुरक्षा बल ने यह भी आश्वस्त किया है कि जानकारी देने वाले किसी भी व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। नागरिकों की थोड़ी सी सतर्कता और समय पर दी गई सूचना किसी भी बड़ी संभावित दुर्घटना को रोक सकती है और हजारों यात्रियों की जान बचा सकती है।



