
हाजीपुर: मोकामा में गंगा नदी पर वर्तमान राजेंद्र पुल के समानांतर बनाए गए नए डबल लाइन रेल पुल का संरक्षा निरीक्षण पूरा हो गया है। रेल संरक्षा आयुक्त, पूर्वी सर्किल, कोलकाता गुरु प्रकाश ने 3 और 4 अक्टूबर को नवनिर्मित राजेंद्रपुल-हाथीदह रेल पुल तथा इससे जुड़े दोहरीकरण और विद्युतीकरण कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद आवश्यक प्राधिकार मिलते ही इस नए पुल से रेल परिचालन शुरू किया जा सकेगा।
करीब 2,400 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह रेल पुल वर्तमान राजेंद्र पुल के समानांतर, पटना छोर की तरफ लगभग 50 मीटर की दूरी पर बनाया गया है। नए पुल पर दोहरी रेल लाइन उपलब्ध कराई गई है।
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15.5 किलोमीटर लंबी है पूरी परियोजना
परियोजना की कुल लंबाई करीब 15.5 किलोमीटर है। इसमें गंगा नदी पर लगभग 1.9 किलोमीटर लंबा मुख्य रेल पुल शामिल है। मुख्य पुल में गंगा नदी के ऊपर 17 स्टील स्पैन बनाए गए हैं। इसके अलावा करीब 3.6 किलोमीटर रेल वायडक्ट का निर्माण किया गया है।
परियोजना के तहत 8 लघु पुल, 2 रोड ओवरब्रिज तथा 3 रेल ओवर रेल संरचनाओं का भी निर्माण किया गया है। पुल की डिजाइन इस तरह तैयार की गई है कि मौजूदा राजेंद्र पुल के एप्रोच में न्यूनतम बदलाव करना पड़े।
हाथीदह, टाल और रामपुर डुमरा से जुड़ेगा नया पुल
नए पुल के दोनों छोर को मौजूदा रेल नेटवर्क के स्टेशनों से ही जोड़ा गया है। उत्तर की ओर यह हाथीदह, टाल और रामपुर डुमरा स्टेशनों से जुड़ा है, जबकि दक्षिण की ओर राजेंद्रपुल और बरौनी की ओर कनेक्टिविटी रहेगी।
नए डबल लाइन पुल के चालू होने के बाद पुराने राजेंद्र पुल पर भी रेल परिचालन जारी रहेगा। इससे इस रेल खंड पर कुल तीन रेल लाइनों की उपलब्धता हो जाएगी।
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रेल ट्रैफिक में 2.5 गुना वृद्धि का अनुमान
नए पुल के चालू होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल संपर्क मजबूत होने के साथ-साथ देश के उत्तर-पूर्वी हिस्सों के लिए भी रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के परिचालन में अतिरिक्त क्षमता मिलेगी।
रेलवे के अनुसार, इस परियोजना के बाद संबंधित रेल मार्ग पर रेल ट्रैफिक में करीब 2.5 गुना वृद्धि होने का अनुमान है। मालगाड़ियों के लिए अतिरिक्त क्षमता मिलने से माल ढुलाई के समय और लागत में कमी आने की उम्मीद है। इससे व्यापार, उद्योग और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही को भी लाभ मिलेगा।
मोकामा का नया गंगा रेल पुल उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल नेटवर्क को अतिरिक्त क्षमता देने के साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और माल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा साबित होगा।


