
प्रहलाद और धु्रव की कथा सुन भावविभोर हुए श्रोता
भुइयाडीह मंे भागवत कथा का चैथा दिन
जमशेदपुर। भुइयाडीह, पटेल नगर, स्लैग रोड़ स्थित प्रीतम मेमोरियल मैदान (डीएभी स्कूल के सामने) में श्री हरि गोविन्द सेवा समिति के तत्वाधान में चल रहे भागवत कथा के चैथे दिन सोमवार को व्यासपीठ पर विराजमान वृन्दावन से पधारे आचार्य हरि जी महाराज ने भगवन के अवतार, भक्त प्रहलाद और भक्त धु्रव, चन्द्र वेश में लीलाधारी, गोविंद के वंश में बाल कृष्ण के अवतार की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए श्री कृष्ण लीलाओं के बारे में बताया। भक्त प्रहलाद और भक्त धु्रव की कथा का मार्मिक वर्णन किया। कथा को सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि भगवान की लीला का कोई भी पार नहीं पाया है। भगवान अंतर्यामी हैं। वह सब कुछ देखता व जानता है। ईश्वर का जाप करने वाले पर आई मुसीबत को स्वयं ईश्वर आकर मदद करता है। जब जब भक्तों पर संकट आता है भगवान उसकी रक्षा के लिए खुद ही आगे आकर उसके कष्टों को हर लेते हैं। आचार्य ने कहा कि यदि प्रभु की भक्ति करनी है तो इन दोनों (प्रहलाद और धु्रव) के जीवन चरित्र से प्रेरणा लेनी चाहिए। दोनों ही प्रभु श्री हरि विष्णु के सच्चे भक्त हैं। सत्य व भक्ति की प्रतिमूर्ति के रूप में इन्हे जाना जाता है। वर्तमान में बच्चों में अच्छे संस्कार के लिए भक्त धु्रव व प्रहलाद की कथा सुनानी चाहिए। सत्संग से अच्छी संगति मिलती है। अच्छी बातें जानने पर बच्चों में भी अच्छे भाव व सुसंस्कार उत्पन्न होते हैं। इसलिए धार्मिक कथाओं के माध्यम से बच्चों को प्रेरित करना चाहिए।
उन्होंने भावनात्मक शैली से भगवान मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम कथा का भक्तों को रसपान कराकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। कहा कि जीवन में राम जैसी मर्यादा होगी तभी हम श्रीकृष्ण कथा के अधिकारी होगंें। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर प्रभु की कथा का श्रवण करते रहे। कथा पर आधारित समेत बाल गोपाल एवं कृष्ण जन्म महोत्सव की झांकी भी प्रस्तुत की गयी जिसे देखकर मौजूद सभी श्रोता भाव विभोर हो गये। चैथे दिन सोमवार को यजमान के रूप में गोविन्द सरोज, डा. एस के तिवारी, शांति तिवारी, सविता सिन्हा, हंसा सरोज, श्रीराम सरोज, हरि ओम सरोज, नन्द सिंह, दिलीप सिंह आदि मौजूद थे।

