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Home » बिहार की दिव्या राज एफएमसी इंडिया की साइंस लीडर्स स्कॉलरशिप पाकर मिट्टी के टिकाऊ उपयोग पर काम करना चाहती हैं
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बिहार की दिव्या राज एफएमसी इंडिया की साइंस लीडर्स स्कॉलरशिप पाकर मिट्टी के टिकाऊ उपयोग पर काम करना चाहती हैं

BJNN DeskBy BJNN DeskMay 28, 2024No Comments5 Mins Read
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पटना

बिहार की बेटी दिव्या राज को कृषि विज्ञान कंपनी, एफएमसी इंडिया द्वारा साइंस लीडर्स स्कॉलरशिप से सम्मानित किया गया है। वे उत्तराखंड स्थित पंत नगर में जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीबीपीयूएटी) में द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं, जो सॉइल साइंस (मृदा विज्ञान) और एग्रीकल्चरल कैमिस्ट्री (कृषि रसायन विज्ञान) विभाग में मास्टर्स कर रही हैं। दिव्या की सॉइल साइंस में गहन रूचि है। उसका लक्ष्य टिकाऊ कृषि के लिए मिट्टी के गुणों और उसके प्रबंधन के बारे में अपने ज्ञान और समझ को बढ़ाना है। एफएमसी इंडिया के समर्थन से, वे इष्टतम कृषि उत्पादन के लिए मिट्टी के उपयोग में सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

एफएमसी साइंस लीडर्स स्कॉलरशिप प्रोग्राम की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी। तब से ही यह एग्रीकल्चरल साइंस की पढ़ाई करने वाले बीस श्रेष्ठ छात्रों को स्कॉलरशिप्स प्रदान करता आ रहा है। हर वर्ष दस स्कॉलरशिप्स पीएचडी करने वाले छात्रों को और दस एग्रीकल्चरल साइंस में एमएससी करने वाले छात्रों को प्रदान की जाती हैं। इनमें से आधी स्कॉलरशिप्स उन प्रतिभाशाली महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जो एग्रीकल्चरल साइंस में अपना करियर स्थापित करने की इच्छा रखती हैं। एफएमसी इंडिया के इस प्रोग्राम का उद्देश्य युवा वैज्ञानिकों को एग्रीकल्चरल रिसर्च और नवाचार में अपने कौशल को बढ़ावा देने के अवसर प्रदान करना है। स्कॉलरशिप प्रोग्राम की स्थापना एग्रीकल्चर इंडस्ट्री में विशेष रुचि रखने वाले युवाओं को उनकी क्षमता और कौशल के सृजन तथा रिसर्च और इनोवेशन का विस्तार करने में मदद करने के दृष्टिकोण से की गई थी।

रवि अन्नवरपु, प्रेसिडेंट, एफएमसी इंडिया, ने कहा, “एफएमसी में, हम एक ऐसा विविध और समावेशी माहौल बनाने के लिए समर्पित हैं, जो कृषि की समग्र प्रगति को बढ़ावा देता है। हम युवा वैज्ञानिकों को कृषि में करियर स्थापित करने हेतु प्रेरित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम रिसर्च और इनोवेशन के महत्व को बखूबी समझते हैं, यही वजह है कि हम युवाओं को इस क्षेत्र की कमान संभालने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, क्योंकि युवा ही हैं, जो नए विचार ला सकते हैं। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कृषि पद्धतियाँ हमेशा मजबूत और टिकाऊ बनी रहें और सभी को लाभान्वित करती रहें।”

डॉ. किरण पी. रावेरकर, डीन- पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज़, जीबीपीयूएटी, ने कहा, “एफएमसी के कर्मियों और सलाहकार समिति के साथ हमारी जो चर्चा हुई है, वह क्षेत्र के अंतर्गत महत्वपूर्ण विचारों और रीसर्च के उद्देश्यों को बढ़ावा देने में काफी मददगार साबित हुई है। एफएमसी के साथ हमारी साझेदारी के माध्यम से छात्रों को प्रदान की गई स्कॉलरशिप्स, उनके कौशल को बढ़ाने में अहम् योदगान दे रही हैं। वे विशेष प्रशिक्षण, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार, वर्कशॉप्स आदि में हिस्सा लेकर अपने कौशल और क्षमताओं का विस्तार करने में सक्षम हुए हैं। बेहतर अवसरों के साथ हमारे छात्र सिर्फ बेहतर करियर ही स्थापित नहीं कर रहे हैं, बल्कि वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए भी आगे बढ़ रहे हैं। उदाहरण के लिए, सॉइल हेल्थ में दिव्या की रुचि जलवायु परिवर्तन में विशेष योगदान देने वाले चैंपियन के रूप में उन्हें स्थापित करती है। ऐसे चैंपियन्स की बहुत जरुरत है, जो संबंधित मुद्दों पर गहराई से शोध करें और उभरती समस्याओं से निपटने के लिए सरकार और उद्योग के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर उपयुक्त समाधान खोजने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग करें। हमारा मानना ​​है कि हमारे प्रतिभाशाली छात्रों के लिए इस तरह के अवसर बड़े पैमाने पर टिकाऊ कृषि प्रथाओं में सुधार करेंगे।”

इस अवसर पर अपने अनुभव को साझा करते हुए, दिव्या ने कहा, “मैं यह मानती हूँ कि कृषि की परिभाषा सिर्फ खेती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह बेहतर करियर के लिए व्यापक सम्भावनाएँ प्रस्तुत करती है। जब मैंने जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया, तो मुझे एफएमसी साइंस लीडर्स स्कॉलरशिप प्रोग्राम के बारे में पता चला। मेरी ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान, सॉइल साइंस के प्रति मेरा जुनून काफी बढ़ गया, क्योंकि यह टिकाऊ कृषि उत्पादन के लिए मिट्टी के गुणों और उसके प्रबंधन के लिए आवश्यक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। मैं इस स्कॉलरशिप प्रोग्राम के लिए एफएमसी की वास्तव में आभारी हूँ, जिसने मुझे आर्थिक रूप से सशक्त होने और विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की है। अपने शोध के माध्यम से, मैं नई पद्धतियों को विकसित करने की इच्छा रखती हूँ, जो कृषक समुदाय के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों का समाधान करते हुए मिट्टी के उपयोग में निरंतर सुधार करें।”

दिव्या ने अपने स्कूल और इंटरमीडिएट की शिक्षा बिहार से पूरी की। इसके बाद आईसीएआर फेलोशिप के तहत जीबी पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीबीपीयूएटी), पंतनगर से ग्रेजुएशन किया। इस दौरान सॉइल साइंस में उनकी रूचि काफी बढ़ गई। इस जुनून को जीवंत करते हुए, दिव्या ने जीबीपीयूएटी, पंतनगर, उत्तराखंड में सॉइल साइंस विभाग में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। उनकी शिक्षा उन्हें कृषि सिद्धांतों और प्रथाओं की गहन समझ प्रदान करने का माध्यम बनी है।

हर वर्ष, एग्रीकल्चरल साइंस में पीएचडी/एमएससी करने वाले बीस छात्रों को, एफएमसी साइंस लीडर्स स्कॉलरशिप से लाभ प्राप्त करने वाले छात्रों की सूची में शामिल होने का मौका मिलता है।

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