जमशेदपुर: मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को धर्मरक्षिणी पौरोहित्य महासंघ के तत्वावधान में वेद अध्ययन अनुशीलन केंद्र, साकची में व्रत-त्योहारों के निर्णय को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जमशेदपुर के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे आचार्यगण उपस्थित रहे। बैठक में व्यापक विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से आगामी व्रत और त्योहारों की शास्त्रोचित तिथियों की घोषणा की गई।
प्रमुख पर्व-त्योहारों की तिथियां
महासंघ द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार प्रमुख पर्वों की तिथियां इस प्रकार रहेंगी:
श्री कृष्ण जन्माष्टमी: 4 सितंबर 2026, शुक्रवार।
हरितालिका (तीज) व्रत: 14 सितंबर 2026, सोमवार को उपवास तथा पारण दूसरे दिन यानी 15 सितंबर मंगलवार को सूर्योदय के बाद होगा। तीज की कथा 14 सितंबर को सुबह से संध्या तक की जा सकती है।
गणेश पूजा: 14 सितंबर 2026 को ही संपन्न होगी।
विश्वकर्मा पूजा: 17 सितंबर 2026, गुरुवार को किया जाएगा।
पितृ पक्ष: प्रारंभ 26 सितंबर 2026, शनिवार से तथा समाप्ति 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को होगी।
जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) व्रत: 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को उपवास तथा इस व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026, रविवार को प्रातः 7:27 बजे के बाद होगा।
शारदीय नवरात्र: 11 अक्टूबर 2026, रविवार को कलश स्थापना के साथ प्रारंभ होगा।
पुरोहितों के लिए निर्देश और उपस्थिति
महासंघ के अध्यक्ष पं. विपिन झा ने अपने संबोधन में सभी पुरोहितगणों से आह्वान किया कि वे अपने यजमान के साथ समय का सामंजस्य बैठाकर कथा का समय सुनिश्चित करें और अपने धर्म का निष्ठापूर्वक पालन करें।
बैठक में सचिव पं. उमेश कुमार तिवारी, प्रवक्ता पं. मुन्ना पाण्डेय, पं. सतेन्द्र पाण्डेय, पं. आनन्द पाण्डेय, पं. कुमुद रंजन झा, पं. संतोष झा, पं. विद्यार्थी पाण्डेय सहित कई अन्य प्रबुद्ध आचार्यगण उपस्थित रहे।
मुख्य बिंदु
आयोजन स्थल: वेद अध्ययन अनुशीलन केंद्र, साकची, जमशेदपुर।
आयोजक: धर्मरक्षिणी पौरोहित्य महासंघ।
प्रमुख निर्णय: जन्माष्टमी (4 सितंबर), तीज (14 सितंबर) और विश्वकर्मा पूजा (17 सितंबर) की तिथियां तय।
अध्यक्षता: पं. विपिन झा (अध्यक्ष)।



