
धनबाद। भारतीय रेलवे के रेल यात्रियों की सुरक्षा, संरक्षा और मानवीय संवेदनाओं के प्रति प्रतिबद्धता का एक शानदार उदाहरण फिर सामने आया है। धनबाद मंडल के टिकट चेकिंग स्टाफ ने अपनी सतर्कता और संवेदनशीलता से एक बड़ा और सराहनीय कार्य किया है। ट्रेन में घर से बिना बताए भागी एक अकेली और घबराई हुई युवती को टिकट परीक्षक (TTE) की सूझबूझ से सुरक्षित बचा लिया गया है। इस त्वरित कार्रवाई से किसी अनहोनी को टालते हुए युवती को उसके परिजनों तक पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है।

कोच S-1 के केबिन में घबराई हुई मिली युवती
रविवार (05 जुलाई 2026) को गाड़ी संख्या 12801 पुरुषोत्तम एक्सप्रेस में ड्यूटी के दौरान धनबाद मंडल के टिकट परीक्षक विजय कुमार राणा द्वारा कोच संख्या S-1 से S-3 में नियमित टिकट जांच की जा रही थी। टिकट जांच के क्रम में जब वह कोच संख्या S-1 के बर्थ संख्या 73/78 के केबिन के पास पहुंचे, तो वहां एक युवती अकेली बैठी हुई दिखाई दी। उसकी शारीरिक भाषा और चेहरे के भाव से वह अत्यंत घबराई और डरी हुई लग रही थी। एक अकेली युवती को इस स्थिति में देख टिकट परीक्षक को संदेह हुआ और उन्होंने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उससे नम्रतापूर्वक पूछताछ शुरू की।
कोडरमा से पकड़ी थी ट्रेन, बैग में मिलीं केवल किताबें
पूछताछ के दौरान युवती ने जो बताया, उससे स्थिति की गंभीरता स्पष्ट हो गई। युवती ने स्वीकार किया कि वह अपने घर में किसी भी परिजन को बिना कोई सूचना दिए या बताए भाग कर आई है और वह इस ट्रेन से दिल्ली जा रही है। जब उससे दिल्ली में रुकने के स्थान के बारे में पूछा गया, तो उसने बताया कि दिल्ली में उसका कोई भी परिचित, रिश्तेदार या दोस्त नहीं है। तलाशी और सुरक्षा के दृष्टिकोण से जब उसके पास मौजूद बैग को देखा गया, तो उसमें केवल कुछ पाठ्य पुस्तकें (किताबें) ही मिलीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वह कोडरमा रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन में सवार हुई थी और बिना किसी तय योजना के दिल्ली जा रही थी।
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सतर्कता दिखाते हुए डेहरी ऑन सोन में आरपीएफ को सौंपा
मामले की संवेदनशीलता और युवती की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए टिकट परीक्षक विजय कुमार राणा ने तनिक भी देरी नहीं की। उन्होंने तत्काल इस पूरी घटना की सूचना धनबाद मंडल के वाणिज्य नियंत्रण (Commercial Control) और पंडित दीन दयाल उपाध्याय (DDU) मंडल के नियंत्रण कक्ष को दी। दोनों मंडलों के बीच त्वरित और आवश्यक समन्वय स्थापित किया गया।
इसके बाद जैसे ही ट्रेन अगले उपयुक्त स्टेशन डेहरी ऑन सोन पर पहुंची, वहां पहले से मुस्तैद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की टीम को युवती को सुरक्षित रूप से सुपुर्द कर दिया गया। आरपीएफ द्वारा अब युवती के परिजनों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया की जा रही है, ताकि उसे सुरक्षित घर पहुंचाया जा सके और आवश्यक सुरक्षा व काउंसलिंग सुनिश्चित की जा सके।
रेलवे प्रशासन ने कर्मचारी के मानवीय दृष्टिकोण की सराहना की
रेलवे यात्रियों की सुरक्षा केवल तकनीकी पहलुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रेल कर्मियों की मानवीय संवेदनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। धनबाद मंडल के रेल प्रबंधक और वरिष्ठ अधिकारियों ने टिकट परीक्षक विजय कुमार राणा की इस सराहनीय तत्परता, सतर्कता और मानवीय दृष्टिकोण की जमकर प्रशंसा की है। रेलवे प्रशासन का कहना है कि कर्मचारियों की इसी तरह की मुस्तैदी से ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और भारतीय रेलवे के प्रति आम जनता का विश्वास और मजबूत होता है।



