
चांडिल (Chandil): सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अंतर्गत लुपुंगडीह स्थित नारायण आईटीआई (Narayan ITI) में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप और महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक व शिक्षाविद गोपाल कृष्ण गोखले की जयंती बेहद श्रद्धा, सम्मान और प्रेरणादायी वातावरण में मनाई गई। इस खास मौके पर कार्यक्रम की शुरुआत दोनों महान विभूतियों के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित करके की गई, जिसमें संस्थान के शिक्षकों और छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
महाराणा प्रताप के साहस और स्वाभिमान को किया गया याद
इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक सह भाजपा नेता जटाशंकर पांडे ने उपस्थित छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप साहस, स्वाभिमान, त्याग और राष्ट्रभक्ति के अमर प्रतीक हैं। उनका संघर्षपूर्ण जीवन आज भी युवाओं को अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने और अपनी मातृभूमि के सम्मान के लिए पूरी तरह समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। जटाशंकर पांडे ने स्पष्ट किया कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने उसूलों और सिद्धांतों से समझौता न करना ही महाराणा प्रताप के जीवन का सबसे बड़ा और अहम संदेश है।
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गोपाल कृष्ण गोखले के सामाजिक और शैक्षिक योगदान पर चर्चा
महान शिक्षाविद गोपाल कृष्ण गोखले के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए जटाशंकर पांडे ने कहा कि वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख विचारकों में से एक थे। गोखले ने देश में शिक्षा, सामाजिक सुधार, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण को एक नई दिशा देने का कार्य किया था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी उन्हें अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। गोखले का संपूर्ण जीवन युवाओं को ज्ञान, निस्वार्थ सेवा और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
आदर्शों को अपनाने का संकल्प और कार्यक्रम में उपस्थिति
जयंती समारोह में उपस्थित सभी शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने दोनों महान विभूतियों के आदर्शों को अपने वास्तविक जीवन में अपनाने तथा समाज एवं राष्ट्रहित में ईमानदारी से कार्य करने का दृढ़ संकल्प लिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से एडवोकेट निखिल कुमार, जयदीप पांडे, शांति राम महतो, प्रकाश महतो, देवाशीष मंडल, शुभम साहू, पवन महतो, अजय मंडल, गौरव महतो, कृष्णा पद महतो, शिशुमती दास और निमाई मंडल सहित संस्थान के कई शिक्षकगण एवं भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


