
चांडिल: झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में हो रही मूसलाधार बारिश ने अब अपना कहर दिखाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को चांडिल गोलचक्कर (Chandil) के समीप निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज के पास पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा अचानक दरककर (Landslide) सड़क पर आ गिरा। पहाड़ काटकर बनाई गई काण्ड्रा (Kandra) की ओर जाने वाली इस नई सड़क पर बड़ी मात्रा में मिट्टी और पत्थर गिरने से आवागमन काफी समय के लिए प्रभावित रहा। गनीमत यह रही कि जिस वक्त यह घटना हुई, उस समय सड़क से कोई वाहन या राहगीर नहीं गुजर रहा था, अन्यथा एक बहुत बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता था।


निर्माण कार्य की सुरक्षा और पर्यावरणीय जोखिम पर उठे सवाल
इस घटना ने केवल यातायात व्यवस्था को ही बाधित नहीं किया है, बल्कि पहाड़ की कटाई (Hill Cutting) के बाद ढलान की स्थिरता, जलनिकासी और पर्यावरणीय सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप: ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए पहाड़ की कटाई तो कर दी गई, लेकिन संवेदनशील ढलानों (Sensitive Slopes) को सुरक्षित रखने के लिए कोई सुरक्षा उपाय (जैसे- रिटेनिंग वॉल) नहीं किए गए।
खतरे की घंटी: लगातार बारिश के बीच मिट्टी और चट्टानों के खिसकने का खतरा अभी भी बना हुआ है। निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने के कारण दुर्घटना की आशंका काफी बढ़ गई है।
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“पहाड़ दरकना केवल प्राकृतिक नहीं, निर्माण की खामी है”: IIT विशेषज्ञ
इस गंभीर विषय पर पर्यावरण विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता डॉ. ईशा बर्मन (Ph.D., IIT ISM धनबाद) ने चिंता जाहिर की है।
वैज्ञानिक कारण: उनके अनुसार, भारी बारिश के दौरान पहाड़ी ढलान का धंसना केवल प्राकृतिक वर्षा का परिणाम नहीं है। पहाड़ की कटाई से ढलान की प्राकृतिक संरचना, वनस्पति आवरण और वर्षाजल के प्रवाह में बदलाव हुआ है। लगातार बारिश का पानी मिट्टी और चट्टानों की दरारों में प्रवेश कर ‘जल-दाब’ (Water Pressure) बढ़ाता है, जिससे भूस्खलन (Landslide) होता है।
क्या है स्थायी समाधान: डॉ. बर्मन ने स्पष्ट किया कि सड़क से मलबा हटा देना कोई स्थायी समाधान नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में ‘Slope Stability Assessment’ और ‘Drainage System’ का होना अनिवार्य है। ढलान को स्थिर करने के लिए रॉकफॉल प्रोटेक्शन नेट (Rockfall Protection Net) और स्थानीय प्रजातियों की वनस्पति लगाना जरूरी है।
स्थानीय लोगों की मांग- ‘तत्काल हो तकनीकी निरीक्षण’
मंगलवार की इस डरावनी घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी से पूरे पहाड़ी हिस्से का तत्काल तकनीकी एवं पर्यावरणीय निरीक्षण (Technical & Environmental Inspection) कराने की मांग की है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए और संवेदनशील हिस्सों को सुरक्षित नहीं किया गया, तो बारिश के दौरान दोबारा मलबा गिरने से कोई बड़ी जनहानि हो सकती है।



