
जमशेदपुर/चक्रधरपुर। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल अंतर्गत बंडामुंडा सीएफ यार्ड में गुरुवार की मध्यरात्रि रेल दुर्घटना की मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान पैसेंजर ट्रेन के तीन कोच के आपस में टकराने, तीन यात्रियों की मौत और 19 यात्रियों के घायल होने का काल्पनिक दृश्य तैयार किया गया। दुर्घटना की सूचना मिलते ही रेलवे के विभिन्न विभागों के अधिकारी, एनडीआरएफ, आरपीएफ और टाटानगर रेल सिविल डिफेंस की टीम राहत-बचाव कार्यों में जुट गई।
यह वास्तविक रेल दुर्घटना नहीं थी, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए रेलवे की तैयारियों को परखने का अभ्यास था।
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रात 2:03 बजे चक्रधरपुर स्टेशन पर बजे पांच हूटर
मॉक ड्रिल के तहत रात 2 बजकर 3 मिनट पर चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन पर अचानक पांच हूटर बजाए गए। इसके बाद उद्घोषणा की गई कि बंडामुंडा सीएफ यार्ड में पैसेंजर ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गई है।
अभ्यास के दौरान ए-वन और बी-वन वातानुकूलित कोच तथा एस-वन स्लीपर कोच के आपस में टकराने का परिदृश्य बनाया गया।
सूचना मिलते ही मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) तरुण हुरिया, अपर मंडल रेल प्रबंधक, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक तथा परिचालन और विद्युत विभाग के अधिकारी घटनास्थल पहुंचे।
टाटानगर रेल सिविल डिफेंस के 27 जवानों ने चलाया बचाव अभियान
टाटानगर रेल सिविल डिफेंस के इंस्पेक्टर संतोष कुमार के नेतृत्व में 27 जवान आवश्यक बचाव उपकरणों के साथ घटनास्थल पहुंचे।
जवानों ने दुर्घटनाग्रस्त कोच में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने, प्राथमिक उपचार देने और घायलों को चिकित्सा शिविर तक पहुंचाने का अभ्यास किया।
एनडीआरएफ की नौवीं बटालियन के जवानों ने भी राहत-बचाव अभियान में हिस्सा लिया। बकेट स्ट्रेचर और रस्सियों की मदद से घायलों को कोच से नीचे उतारा गया। आधुनिक उपकरणों से कोच की खिड़कियां काटकर अंदर फंसे यात्रियों को निकालने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।
मॉक ड्रिल में तीन मृत और 19 घायल यात्रियों का बनाया गया दृश्य
रेलवे की मॉक ड्रिल में कुल 19 यात्रियों को घायल और तीन यात्रियों को मृत दिखाया गया। चिकित्सा दल ने घायलों की जांच, प्राथमिक उपचार और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया का अभ्यास किया।टाटानगर सिविल डिफेंस की टीम ने दुर्घटना जैसा दृश्य तैयार करने के लिए डमी का भी इस्तेमाल किया।इस अभ्यास का उद्देश्य यह जानना था कि वास्तविक रेल हादसे के दौरान घायलों को कितनी जल्दी सहायता पहुंचाई जा सकती है।
टाटानगर, चक्रधरपुर और राउरकेला में हेल्प डेस्क का भी अभ्यास
रेलवे ने दुर्घटना के दौरान यात्रियों और उनके परिजनों को सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी परखी।इसके तहत टाटानगर, चक्रधरपुर और राउरकेला रेलवे स्टेशनों पर हेल्प डेस्क स्थापित करने का अभ्यास किया गया।मॉक ड्रिल में यात्रियों के सामान की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया। एक व्यक्ति को यात्री का सामान लेकर भागते हुए दिखाया गया, जिसे पकड़कर जीआरपी के हवाले करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।
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आरपीएफ के 45 जवान और स्काउट्स-गाइड्स के 23 सदस्य हुए शामिल
इस व्यापक मॉक ड्रिल में कई विभागों और राहत एजेंसियों ने हिस्सा लिया।
टाटानगर रेल सिविल डिफेंस के 27 जवान
रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के 45 जवान
स्काउट्स एंड गाइड्स के 23 सदस्य
एनडीआरएफ की नौवीं बटालियन के जवान
सेंट जॉन एम्बुलेंस के स्वयंसेवक
सभी टीमों ने आपसी समन्वय के साथ राहत-बचाव कार्यों का अभ्यास किया।
तीन घंटे चली मॉक ड्रिल, डीआरएम तरुण हुरिया ने की समीक्षा
लगभग तीन घंटे तक चले अभ्यास के बाद डीआरएम तरुण हुरिया ने राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा की।उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों की सुरक्षा, त्वरित प्रतिक्रिया और विभागों के बीच बेहतर समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है।डीआरएम ने सहायता केंद्रों की संचार व्यवस्था को मजबूत बनाने और नियमित अंतराल पर मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए।उन्होंने टाटानगर रेल सिविल डिफेंस की त्वरित कार्रवाई की सराहना भी की।

रेलवे के अनुसार, अचानक मध्यरात्रि में मॉक ड्रिल आयोजित करने का उद्देश्य यह परखना था कि किसी वास्तविक दुर्घटना की सूचना मिलने पर संबंधित विभाग और राहत एजेंसियां कितनी तेजी से सक्रिय होती हैं।

