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Home » कैट ने ई-कॉमर्स अनियमितताओं के मुद्दे पर पीएम मोदी से हस्तक्षेप का किया आग्रह
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कैट ने ई-कॉमर्स अनियमितताओं के मुद्दे पर पीएम मोदी से हस्तक्षेप का किया आग्रह

BJNN DeskBy BJNN DeskOctober 4, 2021No Comments4 Mins Read
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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को आज भेजे गए एक पत्र में कैट ने एफडीआई नीति और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम/नियम (“फेमा”) की अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट द्वारा खुले रूप से उल्लंघन किए जाने के व्मुद्दे पर इन दोनों कम्पनियों के यापार मॉड्यूल की जांच हेतु उनके तत्काल सीधे हस्तक्षेप का आग्रह किया है । कैट ने गहरा खेद व्यक्त किया है कि विभिन्न सरकारी विभागों एवं एजेंसियों के साथ विगत लम्बे समय से अनेक शिकायतें भी दर्ज की गई हैं लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा अभी तक कोई महत्वपूर्ण कार्रवाई नहीं की गई है और इस तरह ये कंपनियां अभी भी सरकार की नाक के नीचे कानून के खुले उल्लंघन में लगी हुई हैं। अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट दोनों की वर्तमान में चल रही फ़ेस्टिवल सेल सरकार की एफडीआई नीति की शर्तों के घोर उल्लंघन का जीवंत उदाहरण है।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री.प्रवीन खंडेलवाल और राष्ट्रीय सचिव श्री सुरेश सोन्थालिया ने प्रधानमंत्री श्री मोदी से कहा कि देश का व्यापारिक समुदाय इस नतीजे पर पहुंचा है कि सरकार ने इन कंपनियों को अपनी पूरी क्षमता से कानून का उल्लंघन जारी रखने की छूट दी है और यह भी माना जा रहा है कि सरकार के कुछ अधिकारियों का उन्हें संरक्षण प्राप्त है यही कारण लगता है की सरकार द्वारा बनाए जाने वाले नियम एवं नीति पिछले दो वर्ष से बनाए जाने में ही लम्बित हैं और सरकारी विभागों द्वारा की जा रही जाँच कछुए जैसी गति से चल रही है जो सरकारी अधिकारियों पर कहावत कि “रोम जल रहा था और नीरो बांसुरी बजा रहा था”, पर चरितार्थ हो रही है ।

श्री खंडेलवाल और श्री सोन्थालिया ने कहा की देश भर में न केवल व्यापारियों बल्कि आम जनता में व्याप्त इस धारणा को स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कानून के किसी भी उल्लंघन के लिए शून्य सहिष्णुता वाली मानसिकता और नीति रखते है तथा देश में छोटे व्यवसायों के व्यापार में वृद्धि के लिए एक चैंपियन के रूप में कार्य करते हैं तो फिर क्यों भारत में ई-कॉमर्स व्यवसाय की वर्तमान निराशाजनक तस्वीर पूरी तरह से अलग है और सरकारी विभाग प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित मापदंडों और दिशानिर्देशों के विपरीत है।

कैट ने यह भी कहा कि 2016 से ये कंपनियां कानूनों और नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं, लेकिन लगभग 5 साल बीत जाने के बाद भी, विभिन्न अधिकारियों को साक्ष्य के साथ कई शिकायतें करने के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 2016 से, सब कुछ परामर्श मोड में या मसौदा तैयार करने के चरण में है, जो इन कंपनियों को ई-कॉमर्स व्यवसाय में अपनी नापाक गतिविधियों को जारी रखने की अनुमति दे रहा है

श्री सोन्थालिया ने कहा कि प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए पत्र में ये भी कहा गया है कि अमेज़ॅन इन्वेंट्री-आधारित खुदरा / ई-कॉमर्स को नियंत्रित करके एफडीआई नीति, फेमा के उल्लंघन सहित अवैध व्यापार प्रथाओं में लिप्त है, जो स्पष्ट रूप से कानून/नीति या नियम
में प्रतिबंधित है। इसके अलावा, अमेज़ॅन अपने कई सहयोगी / संबद्ध संस्थाओं जैसे “क्लाउडटेल” और “एपेरियो” के माध्यम से लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना और गहरी छूट के माध्यम से पूंजी डंपिंग के लिए एफडीआई का दुरुपयोग कर रहा है, ये दोनों ही अमेज़ॅन प्लेटफॉर्म पर पसंदीदा विक्रेता के रूप में भी काम करते हैं।

दोनों व्यापारी नेताओं में कहा की हाल hee में अनेक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया अमेज़ॅन ने कानूनी धन के दुरुपयोग पर एक आंतरिक जांच शुरू कर दी है जिसमें कहा गया की लीगल फ़ीस के ज़रिये सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी है है ।

कैट ने कहा कि ऐमज़ान ने एक स्पष्टीकरण जारी कर इस बात को ख़ारिज किया लेकिन ऐमज़ान के अपने स्वयं के द्वारा विभिन्न विभागों में जमा किए गए दस्तावेज़ों के साथ ऐमज़ान का स्पष्टीकरण मेल ही नहीं खाता । उदाहरण के तौर पर केवल दो साल में कानूनी और व्यावसायिक शुल्क के लिए 5262 करोड़ रुपये का भुगतान दिखाता है जो कुल बिक्री का लगभग 8% है। जबकि ऐमज़ान ने अपने स्पष्टीकरण में इस राशि को केवल 52 करोड़ बताया है ।इतना बड़ा खर्च भ्रस्टाचार निवारण अधिनियम (पीसीए) और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) और देश के अन्य कानूनों के तहत तत्काल जांच को मानता है।
सुरेश सोन्थालिया ने कहा कि चूंकि उक्त कथित आरोप में सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की बात कही गई है इसलिए यह मुद्दा देश की गरिमा से जुदा है और इसलिए संबंधित विभागों एवं एजेंसियों को इस गंभीर मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लेना चाहिए था लेकिन आज तक कोई कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। जिसके चलते देश के व्यपारी यह समझने को मजबूर है कि एजेंसियों के लिए कुछ भी नहीं हुआ है या “सब चलता है” रवैया और मानसिकता देश में प्रचलित है और यही कारण है कि कैट प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप की मांग की है ।

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