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Home » जमशेदपुर में थम गया स्नेक रेस्क्यू का काम, रोज बढ़ रहें सर्पदंश के मामले
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जमशेदपुर में थम गया स्नेक रेस्क्यू का काम, रोज बढ़ रहें सर्पदंश के मामले

BJNN DeskBy BJNN DeskJuly 28, 2020No Comments5 Mins Read
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● स्नेक रेस्क्यू के लिए लाइसेंस दिलाने को पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी से मिले स्नेक सेवर्स, डीसी और एसएसपी को भी लिखा गया पत्र

● पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने वन विभाग के सचिव एपी सिंह से बात कर समाधान का आग्रह किया

जमशेदपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में बरसाती मौसम में सर्पदंश के मामलों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। जमशेदपुर वन विभाग या जिला प्रशासन के पास भी प्रशिक्षित और दक्ष स्नेक रेस्क्यूर्स का अभाव है। इधर पिछले दिनों किसी अज्ञात की शिकायत पर जमशेदपुर डीएफओ और आरएफओ ने जमशेदपुर के कुछ स्नेक सेवर्स को साँप रेस्क्यू करने पर रोक लगाया है। हालांकि इसके लिए अबतक वन प्रशासन की ओर से स्नेक सेवर्स को कोई लिखित सूचना या विभागीय पत्र नहीं सौंपी गई है। लेकिन वन विभाग की चेतावनी और झूठे शिकायतों से परेशान होकर आवासीय इलाकों से सुरक्षित साँप रेस्क्यू करने वाले युवाओं ने काम रोक दिया है। इससे जमशेदपुर की आम जनता बुरी तरह से प्रभावित हुई है। बागबेड़ा निवासी छोटू स्नेक सेवर के नाम से प्रख्यात मिथिलेश श्रीवास्तव और उनकी टीम से जुड़े युवकों ने जमशेदपुर सहित आसपास के इलाकों के आवासीय क्षेत्र और घरों से साँप रेस्क्यू पिछले एक सप्ताह से बंद कर दिया है। स्नेक सेवर्स का कहना है कि वे सांपों से इंसान को बचाते हैं और साँप को भी सुरक्षित जंगलों में छोड़ देते है। इसकी बकायदा पूरी वीडियोग्राफी और कागज़ी दस्तावेज संधारित रखे जाते हैं। इसके बावजूद भी किसी अज्ञात की झूठी शिकायत पर लगी अघोषित रोक से स्नेक रेस्क्यूर्स चिंतित हैं। इससे जमशेदपुर की आम जनता की भी कठिनाई काफ़ी बढ़ गई है। मिथिलेश श्रीवास्तव उर्फ़ छोटू स्नेक सेवर ने दो दिन पहले ही जमशेदपुर के उपायुक्त सूरज कुमार और एसएसपी एम तमिल वाणन को पत्र भेजकर जिला प्रशासन की ओर से अनुमति और लाइसेंस देने का आग्रह किया। मंगलवार को शहर के पाँच स्नेक रेस्क्यूर्स ने पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी से मिलकर इस मामले में हस्तक्षेप कर उतपन्न समस्या के समाधान का आग्रह किया।

● स्नेक रेस्क्यू टीम के अनुभवों का लाभ ले जिला प्रशासन : कुणाल षाड़ंगी

टीम ने पूर्व विधायक को एक पत्र भी सौंपा है। स्नेक रेस्क्यू टीम की चिंता को वाज़िब और जनहित में बताते हुए पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि जिला प्रशासन और वन विभाग को प्रशिक्षित और दक्ष युवा स्नेक रेस्क्यूर्स के अनुभवों का लाभ लेना चाहिए। साँप पकड़ने पर रोक लगाना क़ानूनी विवशता हो सकती है लेकिन इससे अब आम लोगों को परेशानी हो रही है। बेहतर होता कि टीम के अनुभवों को आधार मानते हुए वन प्रशासन इन्हें सशर्त लाइसेंस स्वीकृत कर आवासीय क्षेत्रों से साँप रेस्क्यू करने की अनुमति देती। पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने इस समस्या के समाधान को लेकर वन, पर्यावरण और जलवायु परिर्वतन विभाग के प्रधान सचिव से दूरभाष पर बात करते हुए सुसंगत और उचित प्रयास करने का आग्रह किया। प्रधान सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह ने आश्वस्त किया कि वे मामले में स्थानीय वन प्रशासन से जानकारी इकट्ठी करने के बाद उचित प्रयास करेंगे। वन विभाग के प्रधान सचिव और पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी के स्तर से मिले आश्वासन के बाद स्नेक सेवर्स ने उम्मीद जताई है कि उन्हें साँप रेस्क्यू करने के लिए विभागीय और प्रशासनिक अनुमति मिल सकेगी। लाइसेंस मिलने के बाद ही वे लोग घरों से साँप रेस्क्यू करेंगे।

● हर दिन आते है 20 से ज्यादा फ़ोन कॉल्स

स्नेक सेवर्स टीम के सदस्य तरुण कालिंदी की मानें तो आम दिनों में उनकी टीम को जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों से लगभग पन्द्रह से बीस फ़ोन कॉल्स आ जातें है। कई बार तो यह आंकड़ा दोगुनी भी हो जाती है। बताया कि जमशेदपुर जिला प्रशासन हो या वन विभाग इनके पास भी घरों से साँप रेस्क्यू करने की मुकम्मल प्रबंध नहीं है। लोगों को उचित समाधान न मिलने की स्थिति में ही कई बार लोग साँप निकलने पर उसे लाठी-डंडों से नुकसान पहुंचा देते हैं। जमशेदपुर में प्रशासनिक अधिकारी हों या पुलिस अफ़सर या चाहें जेलर ही क्यों न हो। साँप देखने के बाद आम हो या खास सभी के पसीने छूटने लगते हैं। ऐसी स्थिति में लोगों की फ़ोन आने पर स्नेक रेस्क्यू टीम के सदस्य मदद को पहुंचते हैं। वन विभाग की मनाही के बाद टीम लोगों को अपनी अत्यावश्यक सेवाएँ नहीं दे पा रही है, इसके उन्हें मलाल है।

● वन विभाग और जिला प्रशासन के पास नहीं है स्नेक रेस्क्यू एक्सपर्ट

रेस्क्यू टीम के अनुसार जिला प्रशासन और वन विभाग के पास साँप पकड़ने के लिए प्रशिक्षित अनुज्ञप्ति धारी लोग नहीं है। फ्रीलांस काम करने वाले लोगों को और कई बार छोटू और टीम की ही मदद ली जाती है। दो वर्ष पूर्व स्नेक सेवर छोटू और उनकी टीम ने नेतरहाट में झारखंड पुलिस के जवानों को भी स्नेक रेस्क्यू और आपात स्थिति में बचाव के तरीकों से प्रशिक्षित किया था। जमशेदपुर में भी घाघीडीह जेलर के दफ़्तर, कई पुलिस डीएसपी सहित प्रशासन के आला अफ़सरों के घर से भी छोटू और उनकी टीम ने सुरक्षित स्नेक रेस्क्यू किया है।

● सर्पदंश से ज्यादा साँप के भय से होती है मृत्यु

स्नेक एक्सपर्ट मिथिलेश श्रीवास्तव उर्फ़ छोटू के अनुसार आम तौर पर सभी साँप जहरीले नहीं होते। भारत में 550 से अधिक प्रजातियों के साँप है जिनमें से दस फ़ीसदी से भी कम प्रजाति के साँप जहरीले होते हैं। झारखंड में मात्र पाँच जहरीली प्रजातियों के सांप पाये जाते हैं। वहीं जमशेदपुर में महज़ तीन जहरीले प्रजाति के साँप पाये जाते हैं। आमतौर पर साँप देखकर ही लोगों के पसीनें छूटने लगतें है। इसी डर और हार्टअटैक की वजह से ज़्यादातर मृत्य होती है। साँप के ज़हर के मृत्यु होने के मामले बहुत कम होते है। लेकीन जागरूकता और जानकारी के अभाव में लोग हद से ज्यादा भयभीत हो जाते है जिससे अप्रिय घटना होती है।

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BJNN Desk
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आनंद किशोर बिहार झारखंड न्यूज़ नेटवर्क में कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे सामाजिक मुद्दों, जनहित और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि रखते हैं। आनंद का उद्देश्य कमजोर और जरूरतमंद लोगों की आवाज को सही मंच तक पहुंचाना है। वे निष्पक्ष, सरल और प्रभावशाली पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं।

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