सरायकेला-खऱसावा।
आदित्यपुर स्थित सेंट्रल पब्लिक स्कूल में मंगलवार को ग्रैंडपेरेंट्स डे (Grandparents Day) बेहद उत्साह, गरिमा और आत्मीयता के साथ मनाया गया। विद्यालय के सभागार में आयोजित इस खास कार्यक्रम में दादा-दादी, नाना-नानी, छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने एक साथ मिलकर प्रेम, सम्मान और पारिवारिक मूल्यों का अनूठा संदेश दिया। इस आयोजन ने नई और पुरानी पीढ़ी के बीच के खूबसूरत रिश्ते को मंच पर जीवंत कर दिया।
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दीप प्रज्ज्वलन और प्राचार्य का प्रेरणादायी संबोधन
कार्यक्रम की शानदार शुरुआत मुख्य अतिथियों के तिलक, पुष्पगुच्छ भेंट और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिससे पूरे प्रांगण में उल्लास और श्रद्धा का संचार हो गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य रामा शंकर सिंह ने अपने प्रेरणादायी उद्घाटन संबोधन में कहा कि दादा-दादी और नाना-नानी परिवार की सबसे अमूल्य धरोहर होते हैं। उनके जीवन के अनुभव, संस्कार और असीम स्नेह बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से अपने बड़ों का सम्मान करने और उनके जीवन मूल्यों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
नन्हे-मुन्नों की रंगारंग प्रस्तुति और ग्रैंडपेरेंट्स का रैम्प वॉक
सांस्कृतिक कार्यक्रम का आगाज विद्यार्थियों द्वारा गाए गए मधुर स्वागत गीत से हुआ। इसके बाद कक्षा एक से पांचवीं तक के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने मनमोहक और रंगारंग नृत्य प्रस्तुत कर वहां मौजूद सभी दर्शकों का मन मोह लिया।
इस भव्य कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और भावनात्मक पल ‘ग्रैंडपेरेंट्स रैम्प वॉक’ रहा। जब दादा-दादी और नाना-नानी सज-धज कर रैम्प पर उतरे, तो उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका जोरदार उत्साहवर्धन किया। इसके अलावा मनोरंजक खेलों और सहभागितापूर्ण गतिविधियों ने कार्यक्रम में आनंद और उत्साह का रंग भर दिया।
सम्मान और आभार के साथ कार्यक्रम का समापन
इस गरिमामयी अवसर पर विद्यालय के ऑफिस एडमिनिस्ट्रेटर टी. वेंकट राव विशेष रूप से उपस्थित रहे और कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ शिक्षक शिव शंकर डे ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने सभी दादा-दादी और नाना-नानी को उनके स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।
साथ ही, अभिभावकों, शिक्षकों और आयोजन समिति के सदस्यों को भी इस सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया गया। यह कार्यक्रम विद्यालय की उस प्रतिबद्धता का एक सशक्त उदाहरण बना, जिसके माध्यम से बच्चों में भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और बड़ों के प्रति आदर भाव विकसित किया जाता है।
