
आदित्यपुर। Adityapur Small Industries Association के अध्यक्ष इंदर अग्रवाल ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri को पत्र लिखकर इंडस्ट्रीज़ के लिए एलपीजी सप्लाई जारी रखने की मांग की है।उन्होंने अपने पत्र में बताया कि 05 मार्च 2026 को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
घरेलू LPG को प्राथमिकता का समर्थन
पत्र में इंदर अग्रवाल ने कहा कि देशभर के घरेलू उपभोक्ताओं को एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार की चिंता सराहनीय है। घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी एक आवश्यक ईंधन है और इसकी उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि एलपीजी का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा उद्योगों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) इकाइयों द्वारा भी उपयोग किया जाता है।
उद्योगों के लिए LPG बेहद जरूरी
उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में एलपीजी की खपत कुल खपत का लगभग 1 प्रतिशत ही है, लेकिन कई मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं में इसका उपयोग अत्यंत आवश्यक है।इंडस्ट्रीज़ में एलपीजी का उपयोग हीटिंग, ब्रेज़िंग, कटिंग, फोर्जिंग, ड्राइंग और अन्य थर्मल प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर किया जाता है। यदि अचानक इंडस्ट्रीज़ के लिए एलपीजी की आपूर्ति बंद कर दी जाती है, तो कई उत्पादन प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं और कई यूनिट्स को अपना संचालन रोकना पड़ सकता है।
आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ेगा असर
पत्र में बताया गया है कि केवल आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में ही दो लाख से अधिक लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से औद्योगिक गतिविधियों पर निर्भर हैं।ऐसे में इंडस्ट्रीज़ के लिए एलपीजी आपूर्ति बंद होने से उत्पादन ठप पड़ सकता है, सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और रोजगार पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
सरकार से दो प्रमुख मांगें
इंदर अग्रवाल ने केंद्रीय मंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए दो प्रमुख सुझाव दिए हैं:
एमएसएमई सहित औद्योगिक इकाइयों के लिए एलपीजी आपूर्ति जारी रखने की अनुमति दी जाए।
इंडस्ट्रीज़ के लिए सीमित कोटा निर्धारित किया जाए, ताकि उत्पादन गतिविधियों में बाधा न आए।
संतुलित समाधान की उम्मीद
उन्होंने कहा कि सरकार के नेतृत्व में ऐसा संतुलित समाधान संभव है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति भी मिलती रहे और उद्योगों की उत्पादन गतिविधियां भी प्रभावित न हों।


