
*विजय सिंह
टाटा स्टील के मानव संसाधन विभाग के उपाध्यक्ष सुरेश त्रिपाठी द्वारा कार्बाइन के लिए आवेदन का समाचार मिला.. लगा कि देश की वैश्विक प्रतिष्ठित कंपनियों में शुमार टाटा स्टील जैसी संस्था के एच.आर. वाईस प्रेसिडेंट सुरेश दत्त त्रिपाठी को आत्मरक्षा के लिए कार्बाइन की जरुरत क्यों आन पड़ी? यह प्रश्न इसलिए क्योंकि टाटा स्टील से हमारा पुराना नाता रहा है.पत्रकारिता के २६ वर्षों में और उससे पहले भी कंपनी अधिकारियों के सामाजिक दायरे को नजदीक से देखा है.सामुदायिक विकास की अवधारणा ने इस सम्मान को और संबलता प्रदान की. जमशेदपुर जैसे शहर में तो टाटा स्टील के अधिकारियों को जो मान सम्मान मिला है वो शायद ही कहीं और किसी को मिला हो. सामाजिक,प्रशासनिक या सरकारी दायरे में हर जगह टाटा स्टील के अधिकारियों की सर्वप्रथम पूछ रही है.
और सबसे बड़ी बात जो मुझे लगी कि औद्योगिक शांति के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध टाटा स्टील जैसी कंपनी के मानव संसाधन विभाग के उपाध्यक्ष(टाटा स्टील में यह पद काफी महत्वपूर्ण और ताकतवर माना जाता है) जिनके पास मानव संसाधन के रूप में इतनी बड़ी पूंजी और ताकत हो उसे आत्मरक्षा के लिए किसी और चीज की जरुरत हो सकती है क्या?
( लेखक *विजय सिंह ,झारखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष तथा मीडिया एथिक्स के क्षेत्र में कार्यरत अंतर्राष्ट्रीय संस्था सेंटर फॉर इंटरनेशनल मीडिया एथिक्स के ग्लोबल कम्युनिकेशन प्रमुख हैं.)



