
जमशेदपुर। विश्व रक्तदान का इतिहास इस वर्ष जब अपना 200वां वर्ष पूरा कर रहा है तो दुनिया के कई युवा उत्साहित हैं कि वे कम से कम इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, क्योंकि उन्होने रक्तदान कर जरूरतमंद लोगों के जीवन को बचाने का प्रयास किया है। 14 जून जब हम विश्व रक्तदाता दिवस के विषय में बात कर रहे हैं, तो इस पीछे 1818 का वह इतिहास छुपा है, जब किसी मनुष्य को दूसरे मनुष्य का रक्त देकर जीवन बचाने का प्रयास किया गया था, यानि पहला ब्लड ट्रान्सफ्युजन आज से करीब 200 वर्ष पूर्व हुआ था, जिसका श्रेय महान वैज्ञानिक जेम्स ब्लन्डेल को जाता है। 14 जून को महान वैज्ञानिक कार्ल लैण्डस्टेनर की 150वीं जयंती हैं, जिन्होने दुनिया को ब्लड ग्रुप से परिचित कराया। इसी महान दिन इस वर्ष के 14 जून को रेड क्रॉस सोसाईटी, पूर्वी सिंहभूम द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन रेड क्रॉस भवन में प्रातः 9 बजे से 3 बजे तक किया गया है, इस दिन को ऐतिहासिक बनायें आइये आजतक अगर आपने रक्तदान नहीं किया है तो इसे करके देखिए, अच्छा लगता हैं। अगर ईश्वर ने आपको समर्थ बनाया है तो इस सामर्थ्य के उपयोग से दुनिया के उन जरूरतमंद लोगों के चेहरों पर हंसी लाने का प्रयास करें, जिनके चेहरे पर हंसी रुपये पैसे से नहीं बल्कि आपके किये रक्तदान से आ सकती है। आईये रक्तदान करें।



