
प्राइवेट स्कूलों में एम्प्लोयी और नॉन-एम्प्लोयी के नाम पर बच्चों की दोहरी फ़ीस नीति के विरुद्ध राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग सख्त, उपायुक्त को कार्यवाई का निर्देश
● भाजपा के जिला प्रवक्ता अंकित आनंद ने की थी शिकायत
● उपायुक्त को 20 दिनों में एनसीपीसीआर को सौंपना है कार्यवाई रिपोर्ट
● कम आमदनी वाले मज़दूरों और नॉन-एम्प्लोयी के बजाए अफ़सरों के बच्चों की फ़ीस में छूट दे रहे स्कूल : अंकित
प्राइवेट स्कूलों में एम्प्लोयी और नॉन-एम्प्लोयी के बच्चों से अलग-अलग फ़ीस लेने के मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने संज्ञान लिया है। भारतीय जनता पार्टी के जिला प्रवक्ता अंकित आनंद द्वारा आयोग में दायर याचिका के आलोक में एनसीपीसीआर ने जिला प्रशासन से जाँच कर 20 दिनों में रिपोर्ट सौंपने को कहा है। ज्ञातव्य हो की ज़िले के सभी कोटि के प्राइवेट स्कूलों में से अधिकांश स्कूलों में बच्चों के संग एम्प्लोयी और नॉन-एम्प्लोयी के नाम पर भेदभाव किया जाता है। टीआरएफ, टाटा मोटर्स, जुस्को, टाटा स्टील, इत्यादि के परमानेंट कर्मियों और अफ़सर ग्रेड के अधिकारियों के बच्चों से प्राइवेट स्कूलों में नॉन-एम्प्लोयी अभिभावकों के बच्चों की तुलना में लगभग 150 से 500 रुपये तक कम फ़ीस लिए जाते हैं। इस बाबत स्कूल प्रबंधनों द्वारा बच्चों को अलग-अलग क़िस्म की फ़ीस बुक भी थमाई जाती है जिसमें स्पष्ट रूप से एम्प्लॉयी और नॉन-एम्प्लोयी के अलग-अलग फ़ीस संरचना की विस्तृत जानकारी अंकित होती है। इसी मामले को भेदभावपूर्ण और दोहरी व्यवस्था क़रार देते हुए भाजपा प्रवक्ता अंकित आनंद ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का सरेआम उल्लंघन बताकर इस मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से कार्यवाई की माँग की थी। विगत 15 फ़रवरी को अंकित आनंद द्वारा किये गए शिकायत के आलोक में आयोग के राष्ट्रीय सदस्य प्रियांक क़ानूनगो ने संज्ञान लेते हुए पूर्वी सिंहभूम ज़िले के उपायुक्त श्री अमित कुमार को मामले में जाँच के निर्देश देते हुए उचित कार्यवाई कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है। इस मामले के शिकायतकर्ता भाजपा नेता अंकित आंनद ने कहा कि आयोग द्वारा डीसी जमशेदपुर को प्रेषित पत्र कि एक कॉपी उन्हें डाक के माध्यम से आज मिली है। उन्होंने कहा कि एक ही स्कूल में एक ही कक्षा में समान शिक्षा ले रहे बच्चों से अलग-अलग फ़ीस लेना ग़लत है। स्कूल में कोई एम्प्लोयी या नॉन-एम्प्लोयी नहीं है। यह समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। कहा कि स्कूलों में विभिन्न कंपनियों के अफ़सर और परमानेंट ग्रेड के अभिभावकों के बच्चों को फ़ीस में 150 रुपये से लेकर 500 रुपये तक कि छूट दी जा रही है। वहीं मज़दूर, बाई-सिक्स,टीएमएसटी एवं नॉन-एम्प्लोयी के बच्चों से 150 से 500 रुपये तक ज्यादा स्कूल फ़ीस वसूले जा रहे हैं। कहा कि कम आमदनी वाले मज़दूरों और नॉन-एम्प्लोयी के बजाए अफ़सर ग्रेड के लोगों के बच्चों की फ़ीस में छूट दिया जाना गलत है। उन्होंने माँग किया कि मज़दूरों और नॉन-एम्प्लोयी के भी बच्चों की फ़ीस एम्प्लोयी कैटेगरी के समान हो। इस आशय की जानकारी देते हुए भाजपा प्रवक्ता अंकित आनंद ने कहा कि एक स्कूल में दोहरी फ़ीस नीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कहा कि उपायुक्त श्री अमित कुमार से न्याय की उम्मीद की जा सकती है।

