
सरायकेला।


कृषि विज्ञान केन्द्र की ओर से सुदूर आदिवासी बहुल पंचायत बुरुडीह क¢ करणगिरीगोड़ा गाँव में किसानों के लिए शिविर का आयोजन कर उन्हें नापेद कम्पोस्ट निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया। कृषि विज्ञान क¢न्द्र की वैज्ञानिक डाॅ0 कंचन माला ने बताया कि वर्तमान में हाट-बाजार समेत घरा¢ं से निकल रह¢ कचड़े का निष्पादन एक गंभीर समस्या बन गई है। जबकि कृषि क¢ क्षेत्र में जमीन की उर्वरा शक्ति भी दिनों दिन क्षीण हा¢ती जा रही है। रसायनिक खाद एवं कम्पोस्ट से मिट्टी पर इसका दुष्प्रभाव की बात सामने आ रही है। उन्हा¢ंने बताया कि अब किसानों क¢ पास मवेशियों की भी कमी हा¢ने से गोबर का खाद भी खेतों में डालना दूभर हा¢ता जा रहा है। इसी कारण उन्हें नापेद कम्पोस्ट निर्माण की जानकारी दी जा रही है। उन्हा¢ंने बताया कि इस कम्पोष्ट से मिट्टी में जल धारण क्षमता, गुणवत्ता एवं उत्पादन क्षमता कई गुणा बढ़ती है। सााथ ही फसलों में रोगों का आक्रमण काफी कम हा¢ता है। इस मौके पर कृषि वैज्ञानिक डाॅ0 लीली किस्पोट््टा ने श्री विधि से खेती की जानकारी भी दी। प्रशिक्षण में कृष्णा मोहन महतो, रत्ना महतो, किशोर महतो, चंचला सरदार, शंभू सिंह सरदार, सोमरा ह¢म्ब्रम समेत काफी संख्या में किसान उपस्थित थे।

